बिना इलाज के लौट गए 2500 से अधिक मरीज, रुके ऑपरेशन

हिन्दुस्तान, प्रयागराज
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प्रयागराज में एसआरएन अस्पताल में अधिवक्ताओं और जूनियर डॉक्टरों के बीच हुई मारपीट के कारण लगभग 2500 मरीज बिना इलाज लौट गए। इमरजेंसी सेवाएं 10 घंटे तक ठप रहीं, जबकि कई मरीज दूसरे अस्पतालों में चले गए। डॉक्टरों ने घटना की जानकारी लेने के लिए जांच समिति का गठन किया है।

बिना इलाज के लौट गए 2500 से अधिक मरीज, रुके ऑपरेशन

प्रयागराज, संवाददाता। एसआरएन अस्पताल में अधिवक्ताओं और जूनियर डॉक्टरों के बीच हुई मारपीट का सबसे बड़ा खामियाजा लगभग 2500 मरीजों को भुगतना पड़ा। भीषण गर्मी में दूरदराज से आए मरीज बिना इलाज के लौट गए। हालांकि जिन मरीजों के पास दवा का पुराना पर्चा था उन्हें सीनियर डॉक्टरों ने परामर्श दिया। ट्रामा सेंटर में सुबह छह बजे से शाम चार बजे तक यानी लगभग 10 घंटे तक इमरजेंसी सेवाएं ठप रहीं। इस बीच किसी नए मरीज को भर्ती नहीं किया गया। पूर्व में निर्धारित ऑपरेशन के अलावा कोई नया ऑपरेशन नहीं किया गया। दूसरे अस्पतालों से रेफर होकर आए मरीजों की एंबुलेंस में सांस अटकी रही। बेली अस्पताल, कॉल्विन अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी से रेफर होकर ट्रामा सेंटर आए 70 से अधिक मरीज दूसरे अस्पताल में इलाज के लिए चले गए। ट्रामा सेंटर में एक्स-रे और सिटी स्कैन की जांच भी बंद रही। कई मरीज स्ट्रेचर पर जांच कराने के लिए अस्पताल के बाहर स्थित निजी पैथोलॉजी गए।

पुलिस प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी

घटना से नाराज जूनियर डॉक्टरों ने ट्रामा सेंटर के अंदर मरीजों के बेड के गद्दे बिछाकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। एडीएम सिटी सत्यम मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट विनोद कुमार सिंह और पुलिस अधिकारियों ने डॉक्टरों से बातचीत करके मामले को शांत करने की कोशिश की लेकिन हल नहीं निकला। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीके मिश्रा ने डॉक्टरों से घटना की जानकारी ली। हड़ताल में शामिल डॉक्टरों की मांग थी कि अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

तीन सदस्यीय जांच समिति गठित

अधिवक्ताओं और जूनियर डॉक्टरों के बीच हुई मारपीट की घटना के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीके पांडेय की ओर से गठित की गई टीम में उप-प्राचार्य डॉ. मोहित जैन, यूरोलॉजी विभाग के डॉ. दिलीप चौरसिया और सर्जरी विभाग के डॉ. संजय सिंह शामिल हैं। जांच समिति को दो दिन के अंदर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। प्राचार्य के अनुसार सीसीटीवी फुटेज के आधार घटना में शामिल लोगों से बातचीत की जाएगी। डॉक्टरों की ओर से भी एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

10 घंटे बाद बहाल हुई इमरजेंसी सेवा

मारपीट की घटना के 10 घंटे बाद ट्रामा सेंटर की इमरजेंसी सेवाएं सामान्य हुईं। उससे पहले ट्रामा सेंटर में बिखरी सामग्री और टूटे सीसों का हटाया गया। साथ ही फर्श पर फैले खून के छीटों की सफाई की गयी। शाम को चार बजे मरीजों को भर्ती करने के लिए काउंटर पर पर्च बनने लगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एसआरएन अस्पताल में मारपीट का खामियाजा किसे भुगतना पड़ा?
मारपीट का खामियाजा लगभग 2500 मरीजों को भुगतना पड़ा।
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