
...मेरे तन-मन को महका देंगे पुरवाइयां बनकर
Prayagraj News - वाणी प्रकाशन ने शुक्रवार को कवि गोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें कई कवियों ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत कीं। हर्षमणि सिंह, महक जौनपुरी, विवेक सत्यांशु और श्लेष गौतम ने अपनी कविताओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। प्रो. कीर्ति कुमार सिंह ने लोकतंत्र पर व्यंग्य किया। इस कार्यक्रम में कई साहित्य प्रेमी और विद्वान उपस्थित रहे।
वाणी प्रकाशन की ओर से शुक्रवार को प्रकाशन के सिविल लाइंस स्थित कार्यालय में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। हर्षमणि सिंह ने काव्य पाठ करते हुए ‘हर कविता जिंदा रहना चाहती है पर हर कविता के पास, किसी किताब के हरफ में खूंटे की तरह बंधे रहने का खिताब हासिल नहीं’ पंक्तियां सुनाई। महक जौनपुरी ने गीत ‘मेरे साथ रहेंगे परछाइयां बनकर, मेरे तन मन को महका देंगे पुरवाइयां बनकर’ की प्रस्तुति से सभी को मंत्रमुग्ध किया। कवि विवेक सत्यांशु ने अपनी कविताएं सुनाकर किताबें पढ़ने के अनुभव से उसे जोड़ा, उन्होंने पंक्तियां ‘जो भूख के आंदोलन में अपने को शामिल होने की सिफारिश करते हुए पाए गए, जो खून से सदा डरते थे’ सुनाई।
कवि श्लेष गौतम ने ‘गिरने के इस दौर का आंखों देखा हाल, पारा जाड़े में गिरा नीयत पूरे साल’ पंक्तियां सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। हीरालाल यादव ने एपीजे अबुल कलाम की कई कविताओं की प्रस्तुति की। अध्यक्षता करते हुए प्रो. कीर्ति कुमार सिंह ने लोकतंत्र की विडंबना पर व्यंग्य करते हुए पेड़ को जड़ से काटे बिना कुल्हाड़ी से पेड़ से मुक्ति नहीं मिल पाएगी पंक्तियां सुनाई। प्रकाशन के बिक्री प्रबंधक योगेंद्र यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। गोष्ठी में डॉ. नंदिता सिंह, शरद सोमवंशी, हितेश कुमार सिंह, अरिंदम घोष, केके श्रीवास्तव, डॉ. अपर्णा गोरे, रणविजय प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।

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