‘शून्य मृत्यु दर’ का दावा बेअसर, छह दिन में 11 की गई जान
Prayagraj News - प्रदेश सरकार की सड़क हादसों में ‘शून्य मृत्यु दर’ मुहिम जमीनी हकीकत में दम तोड़ती नजर आ रही है। छह दिनों में हुए हादसों में दो बोर्ड परीक्षार्थियों सम
प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। प्रदेश सरकार की सड़क हादसों में ‘शून्य मृत्यु दर’ मुहिम जमीनी हकीकत में दम तोड़ती नजर आ रही है। जनवरी में जारी आदेश के बावजूद प्रयागराज में सड़क हादसों की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही। छह दिनों में हुए हादसों में दो बोर्ड परीक्षार्थियों समेत 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इन घटनाओं ने प्रशासन की तैयारियों व अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे दर्दनाक मामला 17 फरवरी को बहरिया क्षेत्र में सामने आया, जहां इंटरमीडिएट की छात्रा वैष्णवी मौर्य की ट्रक की चपेट में आने से मौत हो गई।
वह अपने फुफेरे भाई के साथ परीक्षा केंद्र देखकर घर लौट रही थी। इसके अगले ही दिन 18 फरवरी को मांडा थाना क्षेत्र के दिघिया चौकी के समीप सात साल के मासूम आजम खां की ट्रैक्टर की चपेट में आने से मौत हो गई। वह घर के बाहर सड़क किनारे खेल रहा था। 19 फरवरी को मऊआइमा में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो ने बाइक सवार दो युवकों 22 वर्षीय नीरज और 20 वर्षीय सचिन को कुचल दिया। उनके दो साथी गंभीर रूप से घायल हैं। 21 फरवरी की रात शास्त्री पुल पर वाहक के धक्के से बाइक सवार 35 वर्षीय प्रदीप की मौत हो गई। वहीं 22 फरवरी की सुबह हंडिया में बोलेरो की टक्कर से बाइक सवार 23 वर्षीय अटल बिहारी यादव व 50 वर्षीय सुरेशचंद्र यादव की मौत हो गई। 23 फरवरी की सुबह केंद्रीय कारागार नैनी के समीप बाइक से स्कूल जा रही कक्षा दो की छात्रा की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई। 20 फरवरी को तो हादसों की लगी झड़ी सोरांव क्षेत्र के भावापुर टोल प्लाजा के पास ट्रक की चपेट में आकर 18 वर्षीय शिवम पटेल की मौत हो गई। शंकरगढ़ के गढ़वा किला के पास हाईस्कूल बोर्ड परीक्षार्थी शिवकुमार की परीक्षा देने जाते समय सड़क हादसे में जान चली गई। करछना में ट्रैक्टर की टक्कर से 38 वर्षीय अजीत की मौत हो गई। इन घटनाओं में एक समानता साफ दिखती है, तेज रफ्तार, भारी वाहनों की लापरवाही और सड़कों पर निगरानी की कमी। कागजों में अभियान, सड़कों पर लापरवाही प्रदेश सरकार ने जनवरी माह में ‘शून्य मृत्यु दर’ के लक्ष्य के साथ सख्ती बरतने का निर्देश दिया था। यातायात नियमों के पालन, हेलमेट व सीट बेल्ट की अनिवार्यता, ओवरलोडिंग व ओवरस्पीडिंग पर कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। लेकिन हालिया हादसे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि अभियान सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है। लोगों का कहना है कि कई प्रमुख मार्गों पर न तो नियमित चेकिंग हो रही है और न ही भारी वाहनों की रफ्तार पर नियंत्रण है।
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