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एसआईआर : छह दिन में 58 फीसदी डिजिटलाइजेशन बना चुनौती

एसआईआर : छह दिन में 58 फीसदी डिजिटलाइजेशन बना चुनौती

संक्षेप:

Prayagraj News - प्रयागराज में एसआईआर के पहले चरण के तहत 46 लाख 44 हजार 191 प्रपत्र वितरित किए गए हैं, जिनमें से केवल 19 लाख 63 हजार 300 प्रपत्रों का ही डिजिटलाइजेशन हुआ है। 6 दिनों में शेष 26 लाख 80 हजार 891 प्रपत्रों का डिजिटलीकरण करना है, जिसके लिए प्रतिदिन 4.5 लाख से अधिक प्रपत्र ऑनलाइन करने होंगे।

Nov 28, 2025 08:11 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रयागराज
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प्रयागराज वरिष्ठ संवाददाता चार नंवबर से शुरू हुए एसआईआर के पहले चरण का काम यानी प्रपत्र वितरण और डिजिटलाइजेशन को पूरा होने में महज छह दिन बचे हैं और अब तक 19 लाख 63 हजार 300 प्रपत्र ही डिजिटलाइज हो सके हैं। यानी महज 41.84 फीसदी काम हो सका है। अब बचे छह दिनों में वितरित 46 लाख 44 हजार 191 प्रपत्रों का डिजिटलाइेशन पूरा करना है। प्रपत्रों को ऑनलाइन करने की बात की जाए तो सबसे आगे कोरांव विधानसभा क्षेत्र है। यहां सर्वाधिक दो लाख 16 हजार 294 यानी 58.98 फीसदी डिजिटलाइजेशन हो चुका है। एक लाख 78 हजार 81 प्रपत्रों को डिजिटलाइज कर बारा दूसरे स्थान पर है।

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यहां पर कुल 54.71 फीसदी डिजिटाइजेशन हो चुका है। तीसरे स्थान पर सोरांव विधानसभा क्षेत्र है, जहां पर एक लाख 82 हजार 282 प्रपत्र डिजिटलाइज हुए हैं यानी कुल 48.08 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अगर शहर के तीनों विधानसभा क्षेत्रों की बात की जाए तो सबसे खराब स्थिति इलाहाबाद उत्तरी विधानसभा क्षेत्र की है। यहां अब तक महज एक लाख छह हजार 918 प्रपत्र डिजिटाइज हुए हैं यानी 24.94 फीसदी। इलाहाबाद दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में एक लाख 12 हजार 40 यानी 27.15 फीसदी और इलाहबाद पश्चिम में अब तक महज एक लाख एक लाख 45 हजार 723 यानी कुल 31.22 फीसदी प्रपत्र डिजिटलाइज हो सके हैं। हर दिन साढ़े चार लाख प्रपत्र करने होंगे ऑनलाइन अब तक कुल 46 लाख 44 हजार 191 प्रपत्रों का वितरण हो सका है, जबकि 19 लाख 63 हजार 300 का डिजिटाइजेशन हुआ है। वर्तमान में 26 लाख 80 हजार 891 प्रपत्र डिजिटलाइजेशन करने हैं। अगर इन्हें बचे छह दिनों में बांटा जाए तो प्रत्येक दिन साढ़े चार लाख से अधिक प्रपत्रों को डिजिटाइज करना होगा। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने सभी अफसरों को निर्देश दिए हैं कि वो इस वक्त केवल एसआरईआर के काम में लगें। ऐसे बूथ जहां पर स्थिति खराब है। उनका एक समूह बनाया गया है। पांच-पांच बूथों पर जिला स्तरीय अफसरों को नोडल बना दिया गया है। जिससे उन बूथों की स्थिति को दुरुस्त किया जा सके। सबसे अधिक नोडल अधिकारी शहरी विधानसभा क्षेत्रों में तैनात किए गए हैं।