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यूपी बोर्ड : परसाई और मर्चेंट ऑफ वेनिस नहीं पढ़ेंगे 12वीं के छात्र

हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजNewswrap
Tue, 21 Jul 2020 05:03 PM
यूपी बोर्ड : परसाई और मर्चेंट ऑफ वेनिस नहीं पढ़ेंगे 12वीं के छात्र

कोरोना के कारण स्कूलों में समय से पढ़ाई-लिखाई शुरू नहीं हो पाने की स्थिति में यूपी बोर्ड ने कक्षा 9 से 12 तक का कोर्स इस साल के लिए 30 प्रतिशत तक कम कर दिया है। बोर्ड ने संशोधित पाठ्यक्रम को अपनी वेबसाइट पर सोमवार रात अपलोड कर दिया। बदले पाठ्यक्रम के मुताबिक इस साल कक्षा 12 कला वर्ग के छात्र-छात्राओं के हिन्दी विषय से गद्य में हरिशंकर परसाई की निंदा रस और अंग्रेजी से मर्चेंट ऑफ वेनिस प्ले को बाहर कर दिया गया है।

हिन्दी के प्रमुख लेखकों सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत, मैथिलीशरण गुप्त और रामधारी सिंह दिनकर आदि की कुछ रचनाओं को बाहर किया है लेकिन कुछ रचनाएं शामिल है। केपी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. योगेन्द्र सिंह ने बताया कि कक्षा 10 हिंदी गद्य में कुल 7 पाठ में से 3 पाठ ईर्ष्या तू न गई मेरे मन से-रामधारी सिंह दिनकर, क्या लिखूं-पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और पानी में चंदा और चांद पर आदमी-जयप्रकाश भारती पाठ्यक्रम से बाहर किए गए हैं।

पद्य के 13 पाठ में से सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा व माखनलाल चतुर्वेदी की कुछ की रचनाओं का कुछ हिस्सा हटा दिया गया है जबकि मैथिलीशरण गुप्त की भारतमाता का मंदिर है यह, केदारनाथ सिंह की नदी और अशोक बाजपेयी की युवा जंगल पूरा पाठ हटाया गया है। सीबीएसई से सीख लेते हुए यूपी बोर्ड ने पाठ्यक्रम किसी ऐसे हिस्से को बाहर नहीं किया जिससे किसी प्रकार की विवाद की स्थिति पैदा हो। साथ ही यह गुंजाइश भी रखी है कि यदि कोई तर्कपूर्ण आपत्ति करता है तो उसपर विषय विशेषज्ञों से सलाह करके आवश्यक संशोधन किया जा सके।

10वीं-12वीं के कई विषयों में महत्वपूर्ण बदलाव

10वीं के अंग्रेजी प्रोस से टॉर्च बियरर व ऑवर इंडियन म्यूजिक, पोएट्री से द नेशन बिल्डर्स, सप्लीमेंटरी रीडर से माई ग्रेटेस्ट ओलम्पिक प्राइज को बाहर किया गया है। विज्ञान से धतु एवं अधतु, तत्वों का आवर्त वर्गीकरण, प्राकृतिक संसाधन, विद्युत का प्रभाव्र विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव को इस साल के लिए बाहर रखा गया है। गणित से त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएं, प्रायिकता व श्रेणी आदि, सामाजिक विज्ञान से औद्योगीकरण का युग, राजनीतिक दल, मुद्रा तथा साख को बाहर किया गया है। 12वीं के इतिहास से उपनिवेशवाद, विभाजन को समझना जबकि नागरिक शास्त्र से समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व, समकालीन विश्व में सुरक्षा, स्वतंत्र भारत में राजनीति आदि, समाजशास्त्र में भूमंडीकरण और सामाजिक परिवर्तन समेत कुछ पाठ हटाए गए हैं।

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