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प्रयागराज

परेशानी: व्यवसाय के लिए लिया कर्ज, अब किस्त चुकाने के लाले

हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजPublished By: Newswrap
Tue, 25 May 2021 04:10 PM
परेशानी: व्यवसाय के लिए लिया कर्ज, अब किस्त चुकाने के लाले

प्रयागराज अभिषेक मिश्र

केस 1: नाम लीलावती पांडेय व्यवसाय विश्वविद्यालय मार्ग पर पान की दुकान। दुकान के लिए नगर निगम से 10 हजार रुपये ऋण लिया। ऋण लेकर दुकान खोली और लॉकडाउन लग गया। अब बैंक से 900 रुपये किस्त जमा करने के फोन आ रहे हैं। दुकान खुल नहीं रही है तो किस्त कहां से जमा करें।

केस 2: गणेश गुप्ता लक्ष्मी टॉकीज चौराहे पर झोले का काम करते हैं। हालात योजना के तहत 10 हजार रुपये का ऋण लिया। दुकान बंद होने के कारण ऋण चुकाने के लिए पैसे नहीं हैं। प्राप्त राशि से ही ऋण जमा कर रहे हैं।

केस 3: मो. अनर मास्टर जहरूल हसन रोड पर फल का ठेला ठेला लगाते हैं। ऋण लेकर ठेला लगाने का काम शुरू किया था। लॉकडाउन में व्यवसाय नहीं चल रहा है। उन्हें किस्त जमा करने के लाले पड़ गए हैं।

ये तीन केस केवल यही बता रहे हैं कि लॉकडाउन में पटरी और गरीब दुकानदारों की हालत क्या हो गई है। लोगों ने रोजगार पाने की लालसा में बैंक से ऋण लेकर काम शुरू किया अब लॉकडाउन के कारण दुकानें बंद करनी पड़ीं। बैंक वाले ऋण की किस्त मांग रहे हैं। ऐसे में ये लोग कहां जाएं। यही हालत दारागंज की सुनीता देवी, खुशबू आदि महिलाओं की है। डूडा के तहत सभी ने ऋण प्राप्त किया अब दुकानें बंद कर सभी घर पर बैठे हैं।

20 हजार से अधिक बंट चुका है ऋण

आजाद स्ट्रीट वेंडर्स यूनियन के प्रदेश महामंत्री रवि शंकर द्विवेदी बताते हैं कि प्रयागराज में 20 हजार से अधिक लोगों को ऋण दिया जा चुका है। ज्यादातर लोगों की माली हालत खराब हो गई है। किसी ने सोचा नहीं था कि महामारी की दूसरी लहर इस कदर असर दिखाएगी। प्रदेश में लॉकडाउन लगेगा। बच्चों को पालने के लिए लोगों ने ऋण लिया अब हजारों लोगों को किस्त देना भारी पड़ रहा है।

ये भी बना मुसीबत

तमाम श्रमिकों को सरकार ने श्रमधन-मानधन योजना से जोड़ा। यह एक पेंशन योजना है। पेंशन योजना के तहत आधा पैसा श्रमिकों को देना होता है। जबकि शेष भाग भारत सरकार देती है। अब पेंशन योजना की राशि इन लोगों के खाते से कट रही है। जिसकी महीने की 200 रुपये की किस्त भी गरीबों को भारी पड़ रही है।

इनका कहना है

गरीबों ने ऋण लिया अब ऋण की किस्त देना मुश्किल हो रहा है। बैंकों से लगातार फोन जा रहे हैं। गरीब दबाव में हैं। आखिर पैसा कहां से दें इसकी समस्या हो गई है। लॉकडाउन से मुसीबत बढ़ गई है।

रवि शंकर द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री आजाद स्ट्रीट हॉकर्स एसोसिएशन

डूडा के तहत तमाम महिलाओं ने स्वरोजगार के लिए ऋण लिया। अभी लोगों ने रोजगार शुरू भी नहीं किया था कि लॉकडाउन लग गया। ऐसे में अब किस्त देना मुश्किल हो रहा है।

पूनम मिश्रा, समाजसेवी

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