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चार साल से निलंबित हैं, साहब अब तो रहम करो

हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजPublished By: Newswrap
Sat, 10 Jul 2021 03:50 AM
चार साल से निलंबित हैं, साहब अब तो रहम करो

केस वन: सहारनपुर के जिला आबकारी अधिकारी रहे अजय कुमार सिंह का निलंबन तीन साल पहले हुआ था। जिले में जहरीली शराब के मामले सामने आने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई थी। अब तक बहाली नहीं हो सकी है।

केस दो: चार साल पहले बाराबंकी में जहरीली शराब का प्रकरण सामने आने के बाद वहां के तत्कालीन जिला आबकारी अधिकारी शिव नारायण दुबे को निलंबित किया गया था। अभी तक बहाली का इंतजार कर रहे हैं।

केस तीन: कानपुर के जिला आबकारी अधिकारी रहे अरविंद मौर्य का निलंबन लगभग ढाई साल पहले हुआ था। यह कार्रवाई भी जिले में जहरीली शराब का मामला सामने आने के बाद हुई थी। अफसर आज भी बहाली की बाट जोह रहे हैं।

ये तीन मामले महज उदाहरण हैं। आबकारी विभाग में 60 से अधिक ऐसे अफसर और कर्मचारी हैं जो लंबे समय से किसी न किसी आरोप में निलंबित चल रहे हैं। आरोप लगने के बाद निलंबन तो किया गया पर इनके प्रकरण का निस्तारण कर बहाली अब तक नहीं की गई। इस तरह का मामला प्रदेश के लगभग हर जिले में है।

क्या कहता है नियम

आबकारी विभाग के नियम के अनुसार अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी निलंबित होता है तो उसकी जांच एक महीने के भीतर होनी चाहिए। छह महीने के भीतर प्रकरण का निस्तारण करते हुए बहाली या फिर आगे की कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। 60 अधिकारी-कर्मचारी तो वो हैं, जिनके निलंबन की अवधि छह माह से अधिक है। इससे कम देखेंगे तो संख्या और बढ़ जाएगी। प्रयागराज में जिला आबकारी अधिकारी के पद पर तैनात रहे संदीप बिहारी मोडवल और इंस्पेक्टर विजय यादव का निलंबन हुए सात महीने से अधिक हो चुके हैं।

यह भी है व्यवस्था

निर्धारित अवधि में निलंबन वापस न होने की दशा में आबकारी विभाग के कर्मचारी को पूरा वेतन देने का नियम है। यहां पर जितने भी अधिकारी और कर्मचारी निलंबित हुए हैं, किसी को भी पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा है। सभी मूल वेतन का आधा ही पा रहे हैं।

लिखा पढ़ी से भी डरते हैं

यह बात सही है कि बहाली में विभाग लापरवाही करता है, लेकिन यह बात भी उतनी ही सही है कि निलंबित अफसर व कर्मचारी इस लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं। इन्हें इस बात का भय होता है कि इससे बहाली की संभावना और कम हो जाएगी।

वर्जन

आबकारी विभाग में निलंबन और निस्तारण के तमाम चरण हैं। बहुत सारे पुराने मामले निस्तारित हो चुके हैं। कुछ मामले अभी लटके हैं। ऐसे मामलों में मंडलायुक्त और डीएम जांच अधिकारी होते हैं। कोरोना काल में हम जांच कर रहे अफसरों से यह नहीं कह सकते कि आरोपित अफसरों की जांच को प्राथमिकता दें। इंस्पेक्टर तक सुनवाई आबकारी आयुक्त करते हैं, लेकिन इसके ऊपर मामला शासन को जाता है। शासन में गए मामलों पर निर्णय आयोग लेता है। आयोग हमारे अधीन नहीं है।

संजय आर भूस रेड्डी, अपर मुख्य सचिव आबकारी

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