अब सैटेलाइट और रोबोट की दिशा बताएगी ‘स्मार्ट डिवाइस
प्रयागराज। यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज के वैज्ञानिकों ने एक नई 'स्मार्ट डिवाइस' बनाई है, जो सैटेलाइट, ड्रोन और रोबोट को सही दिशा पहचानने में मदद करेगी। यह तकनीक 20 फीसदी ज्यादा सटीक है और कम बिजली खर्च करती है। इसका उपयोग स्मार्टफोन, टैबलेट और वर्चुअल रियलिटी में भी होता है।

प्रयागराज। यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज (ईसीसी) समेत तीन संस्थानों के वैज्ञानिकों ने ऐसी नई ‘स्मार्ट डिवाइस’ तैयार की है, जो सैटेलाइट, ड्रोन, रोबोट और स्मार्ट गाड़ियों को सही दिशा पहचानने में पहले से ज्यादा मदद करेगी। डबल ट्यूनिंग फोर्क पीजोइलेक्ट्रिक एमईएमएस जाइरोस्कोप (एक बहुत ही छोटा माइक्रो-साइज सेंसर है जो किसी उपकरण की कोणीय गति और घूमने की दिशा को मापता है) आधारित तकनीक से डिवाइस विकसित की गई है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह तकनीक मौजूदा सिस्टम के मुकाबले करीब 20 फीसदी ज्यादा सटीक काम करेगी। यह शोध हाल ही में यूरोपियन जर्नल इंजीनियरिंग रिसर्च एक्सप्रेस में प्रकाशित हुआ है। इस शोध में ईसीसी के डॉ. प्रेम प्रकाश सिंह, आईईआरटी के सुमीत कुमार सिंह और मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गोरखपुर के राम बिलास प्रसाद शामिल रहे।
नई डिवाइस की विशेषताएँ
डॉ. प्रेम प्रकाश सिंह ने बताया कि यह नई डिवाइस बहुत कम बिजली खर्च करती है और काम के दौरान आने वाले बाहरी झटकों, कंपन और गलत संकेतों को काफी हद तक रोक देती है। इससे दिशा और घूमने की जानकारी ज्यादा साफ और सही मिलती है। डॉ. सिंह ने बताया कि परीक्षण में यह तकनीक काफी स्थिर और भरोसेमंद साबित हुई। इसका फायदा भविष्य में ड्रोन उड़ाने, सैटेलाइट कंट्रोल करने और रोबोट चलाने जैसी तकनीकों में मिलेगा।
तकनीकी उपयोग
डॉ. सिंह ने बताया कि इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल स्मार्टफोन और टैबलेट में भी होता है। मोबाइल स्क्रीन का अपने आप घूमना, कैमरे में फोटो लेते समय हाथ हिलने पर भी तस्वीर साफ आना, वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी जैसी सुविधाओं में भी ऐसे सेंसर अहम भूमिका निभाते हैं।
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