मां की परवरिश के लिए बेटे-बेटियों ने खींच दी त्याग की लंबी रेखा
प्रयागराज में कई बेटे-बेटियां मां की सेवा के लिए अपने जीवन का बलिदान दे रहे हैं। उन्होंने शादी नहीं की, नौकरी छोड़ दी और मां की देखभाल की। मातृत्व दिवस पर मां के प्रति उनके त्याग और समर्पण को उजागर किया जाएगा।

प्रयागराज। ईश्वर शरण शुक्ल मां शब्द में ही पूरी कायनात का प्रेम और सुख समाया है। मां का हर दिन अपनी संतान के लिए एक उपहार सा होता है। मां का प्रेम नि:स्वार्थ और असीम होता है। आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर उन एहसानों को भूल जाते हैं, जो मां ने हमारे लिए करती हैं। लेकिन शहर में ऐसे बेटे-बेटियां हैं, जिन्होंने मां की सेवा के लिए त्याग व समर्पण की एक लंबी रेखा खींची है। मां की सेवा के लिए उन्होंने खुद का फ्रिक नहीं किया। मां के प्रति जिम्मेदारियों के कारण शादी तक नहीं की। विदेश में शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद मां की सेवा के लिए घर नहीं छोड़ा। मां ने अंतिम सांस ली तो बेटी ने अर्थी को कंधा दिया और पारंपरिक रूप से अंतेष्टि भी की। मां के प्रति कृतज्ञता और प्रेम व्यक्त करने के लिए रविवार को ‘मां के प्रति आभार, स्वास्थ्य और नि:स्वार्थ प्रेम’ थीम पर मातृत्व दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर प्रस्तुत है, मां के प्रति समर्पित बेटे-बेटियों के असीम त्याग और समर्पण पर केंद्रित रिपोर्ट।
मां के लिए रहीं अकेलीं, वृद्धाश्रम में गुजार रहीं जीवन
बैरहना की रहने वाली लेखिका देवयानी दो भाई भाईयों में बड़ी थीं। लेकिन दोनों भाई की बचपन में ही मौत हो गयी। देवयानी ने बताया कि मां सविता मुखर्जी ने मुझे पढ़ाया लिखाया तो मैं उन्हें अकेला कैसे छोड़ सकती थी। पढ़ाई के बाद एक निजी कंपनी में नौकरी करते हुए मां की सेवा करती रही। मां की देखभाल के कारण शादी के बारे में भी नहीं सोचा। मां का जब उनका निधन हुआ तो दारागंज घाट पर उनकी अंतेष्टि भी की। परिवार में जब कोई नहीं रहा तो कानपुर रोड पर स्थित एक वृद्धाश्रम में रहने लगी। देवयानी की हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं में 10 पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं।
मां की सेवा के लिए छोड़ दी सरकारी नौकरी
बहादुरगंज के रहने वाले रवीन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पढ़ाई के बाद रायबरेली आईटीआई स्कूल में नौकरी शुरू की थी। लेकिन मां कमला की सेवा के लिए नौकरी छोड़कर घर आ गया। दो भाई शहर से बाहर नौकरी करते थे। इसलिए मां की सेवा करने की जिम्मेदारी मैंने उठाई। मां की देखभाल के लिए एक निजी कंपनी में नौकरी करने लगा। मां के प्रति अटूट स्नेह और प्रेम के प्रति इतना समर्पित रहा कि शादी न करने का फैसला किया।
मां का आशीष मेरे लिए संजीवनी बन गया
नैनी के प्रयागपुरम की रहने वाली रेनू विज मुट्ठीगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका हैं। उनके भाई कपिल कुमार कानपुर में नौकरी करते थे। लिवर कैंसर होने के कारण उनकी मौत हो गयी। मां धनवंती देवी की परवरिश की जिम्मेदारी रेनू संभालती हैं। रेनू ने बताया कि मां की सेवा के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी के कारण शादी करने के बारे में भी नहीं विचार किया। अध्यापन के साथ मां की देखभाल की भी जिम्मेदारी संभालती हूं।
चीन में शिक्षा प्राप्त कर मां की सेवा के लौटीं वतन
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नाज फात्मा ने अपनी मां सहरून निसा की सेवा के लिए जीवन में बड़ा त्याग किया। उन्होंने चीन में डॉक्टरी की शिक्षा प्राप्त की। वहां उन्होंने बतौर योगा विशेषज्ञ कार्य किया। लेकिन मां की परवरिश के लिए प्रयागराज लौट आईं। यहां पर डफरिन अस्पताल में कुछ साल तक कार्य किया। उसके बाद करेली स्थित साठ फीट रोड पर नाज अस्पताल की शुरूआत की। डॉ. नाज का कहना है मां से बड़ा इस जहान में कुछ भी नहीं है।
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