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हिंदी न्यूज़ उत्तर प्रदेश प्रयागराजवही कक्षा और सीट, 25 साल बाद दोस्तों संग ढेर सारी मस्ती

वही कक्षा और सीट, 25 साल बाद दोस्तों संग ढेर सारी मस्ती

हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजNewswrap
Mon, 01 Nov 2021 03:30 AM
वही कक्षा और सीट, 25 साल बाद दोस्तों संग ढेर सारी मस्ती

किसी के बालों पर सफेदी आ चुकी है तो कई के चेहरे बदल चुके थे, उम्र अपना असर दिखा रही थी। मगर 25 वर्ष के अंतराल के बाद जब सब मिले तो ऐसा लगा कि मानो 1996 का वह साल लौट आया है, जिसमें पढ़ाई के साथ खूब मस्ती होती थी, बेफिक्री थी। शिक्षकों का डर था तो उतना ही मान-सम्मान भी। यह दृश्य दिखा रविवार को राजकीय इंटर कॉलेज में, जहां 1996 बैच के छात्रों का सम्मेलन आयोजित था।

पूरे ढाई दशक बाद जब जीआईसी के पुरा छात्र रविवार को कॉलेज पहुंचे तो उनकी आंखों में चमक देखते ही बन रही थी। सभी एक-दूसरे से गलबहियां करते हुए अपनी-अपनी कक्षाओं में पहुंचे और अपनी-अपनी उन सीटों पर बैठे, जहां 25 साल पहले बैठते थे। किसी ने तब का किस्सा सुनाया तो कोई दीवार व सीट पर अपना नाम खोजने में जुटा, जो उसने स्कूल के दिनों में लिखा था। इसी बीच, एक छात्र ने स्कूल की घंटी बजाई तो सभी भागकर प्रार्थना स्थल पर पहुंच गए। वहां पुराने शिक्षकों को देखकर पुरनिए छात्र पहले की तरह ठिठक गए, फिर आगे बढ़कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद सभी छात्र कतार में खड़े होकर प्रार्थना के लिए तैयार हो गए। प्रार्थना के बाद सभी शिक्षकों को शॉल, स्मृति चिह्न व किताबें देकर सम्मानित किया। पुरा छात्रों की ओर से स्कूल को पंखे भेंट किए गए। पुरा छात्रों ने क्रिकेट मैच भी खेला।

सबकी जुबां पर अपने-अपने किस्से

छात्र चाहे गणित, जीव विज्ञान वर्ग के रहे हों या आर्ट्स और कॉमर्स के, सबकी जुबां पर अपनी-अपनी यादें थीं, जिसे सभी से साझा कर रहे थे। किस्सों का दौर तो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था, फिर चाहे रवींद्र नाथ टैगोर उद्यान में गेंदतड़ी खेलने का किस्सा हो या स्कूल में फोटो सेशन का। खेल के दौरान लड़ाई-झगड़ों का दौर रहा हो या साइकिल स्टैंड में होने वाली गुफ्तगू का।

शिक्षकों ने दिया आशीर्वाद

शिक्षकों के सम्मान के दौरान उन शिक्षकों को याद किया गया जो अब जीवित नहीं हैं। कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने छात्रों को उसी तरह जिंदगी के फलसफे समझाए जैसे वे क्लास के दौरान कोई पाठ समझाते थे। उन्होंने सभी छात्रों को बेहतर भविष्य का आशीर्वाद दिया तो समाज में महत्वपूर्ण योगदान देने को प्रेरित भी किया।

जब भर आईं आंखें

कार्यक्रम के बाद जब विदा होने की बारी आई तो कई छात्र गले मिलकर भावुक हो उठे। वे कहने लगे कि काश वक्त थम जाए, मगर समय ठहरता नहीं है। आखिरकार पुरनिए छात्रों ने फिर मिलने का वादा कर एक दूसरे को विदाई दी। संचालन आशीष रत्न मिश्र और प्रवीण पांडेय ने किया। आशुतोष मिश्र, विकास कुशवाहा, यतीश्वर मिश्रा, रुद्र प्रताप ओझा, कपिल श्रीवास्तव, परवेज सिद्दीकी समेत कई छात्रों ने संयोजन किया।

एडीजे संजय मिश्रा बोले, मानो अतीत की कोई खिड़की खुल गई

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एडीजे कौशांबी संजय मिश्रा ने बताया कि वह खुद इसी जीआईसी से पढ़े हैं। इतने वर्षों बाद उसी स्कूल में चीफ गेस्ट बनकर आना मेरे लिए बड़ा सम्मान है। ऐसा लग रहा है मानो अतीत की कोई खिड़की खुल गई है और सारी यादें एक एक कर मन को तसल्ली दे रही हैं। इस दौरान जीआईसी के प्रिंसिपल वीपी सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम सरदार वल्लभ भाई पटेल सभागार में संपन्न हुआ।

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