गंगा का जलस्तर बढ़ने पर पांटून पुल से आवागमन बंद
Prayagraj News - प्रयागराज में गंगा का जलस्तर बढ़ने से फाफामऊ और तेलियरगंज के बीच बने दो पांटून पुलों से आवागमन ठप हो गया है। फाफामऊ-तेलियरगंज पुल का एक हिस्सा डूब गया है और दूसरा पुल पूरी तरह बंद कर दिया गया है। बैराजों से पानी के डिस्चार्ज बढ़ने से कछारी खेती को भी नुकसान हुआ है।
प्रयागराज। गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद फाफामऊ और तेलियरगंज के बीच बने दो पांटून पुलों से आवागमन ठप हो गया। फाफामऊ-तेलियरगंज पांटून पुल का हिस्सा गंगा में डूब गया है। तेलियरगंज-फाफामऊ (दूसरा पांटून पुल) पूरी तरह बंद कर दिया गया है। दूसरे पुल की चकर्ड प्लेट भी हटा दी गई है। बैराजों से डिस्चार्ज बढ़ाए जाने की वजह से प्रयागराज और कौशाम्बी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से कछारी खेती को भी नुकसान हुआ है। फाफामऊ कछार में प्रतिदिन आवागमन करने वालों ने बताया कि गुरुवार को पांटून पुल से जोड़ने के लिए बेला कछार में बिछाई गई चकर्ड प्लेट डूबी।
लोगों के मुताबिक, तीन दिन पहले से दूसरे पांटून पुल की चकर्ड प्लेट खोली जाने लगी। बीते 25 मार्च को कानपुर बैराज से 16,229 क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा। इसके चलते पहले कौशाम्बी और प्रयागराज के कछारी क्षेत्र में होने वाली खेती को नुकसान हुआ। इसके बाद पांटून पुल के रास्ते में गंगा का प्रवाह पहुंच गया। मार्च-अप्रैल में कानपुर बैराज से गंगा में औसतन आठ हजार क्यूसक पानी छोड़ा जाता है।मौसम में उथल-पुथल के चलते उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के मैदानी क्षेत्र में रुक-रुककर हो रही बारिश और नहरों का पानी रोके जाने से गंगा का जलस्तर बढ़ा। सिंचाई विभाग बाढ़ प्रखंड के अधिशासी अभियंता दिग्विजय नारायण शुक्ला ने बताया कि 23 मार्च को कानपुर बैराज से 8361 क्यूसेक और 24 मार्च 6360 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। उसके बाद कानपुर बैराज से गंगा में डिस्चार्ज बढ़ता रहा। बारिश की वजह से नहरों का पानी भी रोका गया। तीन अप्रैल को 12991 क्यूसके पानी बैराज से छोड़ा गया है। अधिशासी अभियंता के मुताबिक इससे बाढ़ का खतरा तो नहीं है लेकिन कछार के सूखे क्षेत्र तक गंगा पहुंच गई हैं।
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