Hindi NewsUttar-pradesh NewsPrayagraj NewsRenowned Poet and Critic Rajendra Kumar Passes Away at 83 in Prayagraj
देहदान कर विदा हुए कवि, आलोचक राजेंद्र कुमार

देहदान कर विदा हुए कवि, आलोचक राजेंद्र कुमार

संक्षेप:

Prayagraj News - वरिष्ठ कवि और आलोचक राजेंद्र कुमार का 83 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने कैंसर से लड़ाई के बाद प्रयागराज में अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार मेडिकल कॉलेज में किया गया, जहां कई साहित्य प्रेमियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। राजेंद्र कुमार ने कई महत्वपूर्ण कृतियों का लेखन और संपादन किया।

Jan 16, 2026 08:07 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रयागराज
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प्रयागराज संवाददाता वरिष्ठ कवि, आलोचक और संस्कृतिकर्मी राजेंद्र कुमार का 83 वर्ष की अवस्था में निधन हो गया। उन्होंने एलनगंज स्थित अपने आवास पर गुरुवार रात करीब दो बजे अंतिम सांस ली। शुक्रवार को दोपहर में उनके पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज को सुपुर्द कर अंतिम विदाई दी गई। सालभर से कैंसर से लड़ते-इलाज कराते राजेंद्र कुमार आगरा, मुंबई और दिल्ली में रहे लेकिन अंत के दिनों में कर्मभूमि प्रयागराज आ गए। उनके निधन की सूचना मिलते ही प्रशंसकों, साहित्य प्रेमियों का तांता लग गया। उनकी इच्छा के अनुसार समयानुसार उनका देहदान किया गया। घर से मेडिकल कॉलेज तक उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी विभागों के प्राध्यापक, छात्र-शोधार्थी, साहित्यकार, पत्रकार, तीनों लेखक संगठनों, कर्मचारी संघों और जिला प्रशासन के प्रतिनिधि, अधिवक्ता समाज के लोग शामिल रहे।

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वह अपने पीछे दो बेटे-बहुओं का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। 24 जुलाई 1943 को कानपुर में जन्मे राजेंद्र कुमार ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की थी। यहीं अध्यापन किया, हिंदी विभाग के अध्यक्ष भी रहे। जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे राजेंद्र कुमार ने अभिप्राय, बहुवचन पत्रिकाओं और साही के बहाने, आलोचना का विवेक, प्रेमचंद की कहानियां, स्वाधीनता की अवधारणा और निराला, अमन बनाम आतंक पुस्तकों का संपादन किया। युवा काल में थियेटर से जुड़े और कई नाटकों में अभिनय किया। ऋण गुणा ऋण, लोहा-लक्कड़, उदासी का ध्रुपद, हर कोशिश एक बगावत है (कविता संग्रह), यथार्थ और कथार्थ, कविता का समय-असमय, आलोचना आसपास, साहित्य में सृजन के आयाम और विज्ञानवादी दृष्टि (आलोचना) उनकी प्रसिद्ध रचनाएं हैं। व्यापक साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान पुरस्कार, गणेशशंकर विद्यार्थी, सम्मान, कुंवरपाल सिंह स्मृति सम्मान, मीरा स्मृति सम्मान प्रदान किया गया।