DA Image
1 मार्च, 2021|7:01|IST

अगली स्टोरी

मेला क्षेत्र में कटान रोकने को घटाया पानी का डिस्चार्ज

मेला क्षेत्र में कटान रोकने को घटाया पानी का डिस्चार्ज

प्रयागराज। वरिष्ठ संवाददाता

माघ मेला में संगम का जल साफ करने के लिए कानपुर बैराज से छोड़ा गया दो हजार क्यूसेक अतिरिक्त पानी मुसीबत बन गया। हालांकि अब बैराज से गंगा में डिस्चार्ज घटाया गया है। गंगा का जलस्तर कम होने से माघ मेला के घाटों के आसपास श्रद्धालुओं के पलायन का खतरा टल गया है।

प्रथम स्नान पर्व पर संगम का जल काला होने से खलबली मच गई थी। जिसके बाद संगम का जल साफ करने के लिए पांच दिन पहले कानपुर बैराज से डिस्चार्ज सात हजार क्यूसेक से बढ़ाकर नौ हजार क्यूसेक कर दिया गया। अतिरिक्त पानी पहुंचते ही संगम का जलस्तर बढ़ने लगा और तेजी से कटान होने लगा। जिससे मेला क्षेत्र के सेक्टर चार और पांच में किनारे बसी संस्थाओं के शिविरों की भूमि गंगा में समाहित होने का खतरा बढ़ गया। खतरे को भांपते हुए कई शिविरों का अन्यत्र बसाया गया और कटान रोकने को बालू की बोरियां लगानी पड़ीं।

कानपुर बैराज से डिस्चार्ज घटा तो संगम का जलस्तर कम होने लगा। सिंचाई विभाग बाढ़ प्रखंड के अधिशासी अभियंता बृजेश कुमार ने बताया कि मंगलवार सुबह आठ बजे से बुधवार सुबह आठ बजे तक तीन सेमी पानी घटा है। अधिशासी अभियंता के अनुसार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 77.01 मीटर था। गंगा का जलस्तर और कम होने की संभावना है।

सभी को चाहिए कगार पर शिविर, यही है मुसीबत

प्रयागराज। माघ मेला में सभी संस्था, तीर्थ पुरोहित नदी किनारे शिविर के लिए भूमि देने की मांग करते हैं। गंगा या संगम किनारे जमीन की मांग को लेकर मेला शुरू होने से पहले विवाद होता है। दबाव में मेला प्रशासन शिविर के लिए नदी किनारे जमीन आवंटन करता है। गंगा का जलस्तर बढ़ने पर कगार के शिविरों को खतरा बढ़ता है। इस बार भी गंगा का जलस्तर बढ़ा तो किनारे से शिविर चपेट में आए। सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि शिविरों को नदी किनारे से दूर भूमि देनी चाहिए। अधिकारी के मुताबिक गंगा का प्रवाह कभी भी बदल सकता है। पानी बढ़ने पर तो कगारों का कटना तय है। फिर भी कगार पर शिविर लगाने के लिए भूमि दी जाती है।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Reduced water discharge to prevent erosion in the fair area