उधार लेकर घी नहीं पीते इलाहाबादी
Prayagraj News - प्रयागराज में बैंक ऋण जमानुपात महज 42 फीसदी है, जबकि प्रदेश सरकार ने इसे 60 से 66 फीसदी के बीच लाने का लक्ष्य रखा है। यहां औद्योगिकीकरण की कमी के कारण ऋण लेने की प्रवृत्ति कम है। जिले में उद्योगों की कमी से 800 करोड़ का लोन बढ़ाना चुनौती है।

प्रयागराज। अभिषेक मिश्र बाबुओं के शहर प्रयागराज में अच्छे खाने-पीने और रहने के तो लोग शौकीन हैं, लेकिन वो अपनी कमाई के दम ही अपने शौक को पूरा करना चाहते हैं। अपनी बड़ी-बड़ी जरूरतों के लिए लोग बैंकों पर निर्भर नहीं हैं। कम से कम बैंकों के ऋण जमानुपात के आंकड़े तो यही कहते हैं।जिले में बैंकों में जमा धनराशि का महज 42 फीसदी ही ऋण के रूप में दिया गया है। ऋण देने के मामले में प्रयागराज प्रदेश में 66वें नंबर का जिला है, जबकि बढ़ते औद्योगिकीकरण को देखते हुए इसे बढ़ाने का दबाव बना हुआ है। प्रदेश सरकार की इच्छा है कि प्रत्येक जिले का बैंक ऋण जमानुपात 60 से 66 फीसदी के बीच रहे।
प्रदेश के प्रत्येक जिले को इसका लक्ष्य दिया गया है। प्रदेश में प्रयागराज से नीचे के जिलों की बात की जाए तो उन्नाव जहां का ऋण जमानुपात 40 फीसदी, प्रतापगढ़ जहां 38 फीसदी, अयोध्या का ऋण जमानुपात 37 फीसदी ही है। वहीं प्रदेश में बड़े जिलों में ऋण लेने वाले जिलों की बात की जाए तो गाजियाबाद 60 फीसदी, नोएडा 64 फीसदी, कानपुर 60 फीसदी है।उद्योग कम होना कारणप्रयागराज जिले का ऋण जमानुपात कम होने का सबसे बड़ा कारण यहां का औद्योगिकीकरण न होना है। लीड बैंक प्रबंधक मणि प्रसाद मिश्र का कहना है कि उद्योग न होने के कारण यहां पर लोन लेने की प्रवृत्ति नहीं है। प्रयागराज जैसे जिले में एक फीसदी लोन बढ़ाने का मतलब है कि आठ सौ करोड़ का लोन देना। अब जिले में 20 फीसदी लोन देने का मतलब हो गया है कि डेढ़ खरब के आसपास लोन देना। अब मकान, दुकान, वाहन के लिए तो इतना लोन होता नहीं है। इतना बड़ी राशि उद्योगों पर ही खर्च होती है।बैंकों का ऋण जमानुपात कम है। जिले का जिस अनुसार विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए सभी बैंकों को इसे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रयागराज के अनुसार ऋण जमानुपात 60 से 62 फीसदी तक हो सकता है।-मनीष कुमार वर्मा, जिलाधिकारीऋण लेने वाले शीर्ष पांच जिलेसंभल 89.68 फीसदीपीलीभीत 87.68 फीसदीललितपुर 86.94 फीसदीबदायूं 86.60 फीसदीमुजफ्फरनगर 86 फीसदी
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