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माघ मेला: श्रद्धालुओं के स्वागत को टेंट कॉलोनी तैयार

माघ मेला: श्रद्धालुओं के स्वागत को टेंट कॉलोनी तैयार

संक्षेप:

Prayagraj News - प्रयागराज में संगम की पुण्य धारा में श्रद्धालुओं के लिए यूपीएसटीडीसी द्वारा आधुनिक टेंट कॉलोनी बनाई गई है। इसमें 50 कॉटेज हैं, जो तीन श्रेणियों में बांटे गए हैं। यहां सात्विक भोजन, यज्ञशालाएं, भजन-कीर्तन और स्थानीय शिल्प के स्टॉल हैं। माघ मेला रोजगार और नवाचार का बड़ा मंच बन रहा है।

Jan 14, 2026 11:09 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रयागराज
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प्रयागराज। संगम की पुण्य धारा में डुबकी लगाने के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालुओं का आना जारी है। इसी क्रम में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित और यादगार अनुभव प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) की ओर से आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित टेंट कॉलोनी बसाई गई है। निगम की ओर से अरैल सेक्टर सात में त्रिवेणी पुष्प से पहले टेंट कॉलोनी बनाई गई है जिसमें कुल 50 अत्याधुनिक कॉटेज बनाए गए हैं। इनकी ऑनलाइन बुकिंग यूपीएसटीडीसी की वेबसाइट से की जा सकती है। टेंट कॉलोनी को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें 15 हजार रुपये किराए वाला प्रीमियम, 11 हजार 500 रुपये का लग्जरी और 7500 रुपये का डीलक्स कॉटेज है।

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यहां कुल 12 प्रीमियम, 8 लग्जरी और 30 डीलक्स टेंट बने हैं। जिनमें ठहरने वाले श्रद्धालुओं के लिए सात्विक भोजन की समुचित व्यवस्था की गई है। टेंट कॉलोनी परिसर में यज्ञशालाएं बनाई गई हैं, जहां लगातार भजन-कीर्तन हो रहा है। सांस्कृतिक रंग देने के लिए कलाग्राम भी विकसित किया गया है, जहां स्थानीय शिल्प और लोककला को बढ़ावा दिया जा रहा है। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, माघ मेले में रोजगार और नवाचार को विशेष बढ़ावा मिला है, जहां संगम टेंट कॉलोनी में एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) प्रदर्शनी के जरिए प्रयागराज की पारंपरिक मूंज कला के भी स्टॉल लगे हैं। यहां के कारीगरों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। माघ मेला न केवल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत कर रहा है, बल्कि उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के लिए व्यापार का बड़ा मंच भी बन गया है, जहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु मूंज से बने डलिया, पेन स्टैंड, रोटी रखने के बर्तन, गमले और सजावटी सामान जैसे उत्पाद पसंद कर रहे हैं। नैनी क्षेत्र के महेवा इलाके की यह पारंपरिक कला, जिसे चांद जैसी कारीगर वर्षों से आगे बढ़ा रही हैं, अब आधुनिक रूप में सामने आकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना पा रही है।