
जीवन में त्याग, तपस्या और बलिदान का पर्याय रहा ‘गुंडा’
Prayagraj News - उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में प्रवीण स्मृति नाट्य महोत्सव का शुभारंभ हुआ। पहले दिन नाटक 'गुंडा' का मंचन हुआ, जो जयशंकर प्रसाद की कहानी पर आधारित है। यह नाटक 18वीं शताब्दी के काशी के एक गुंडे की कहानी बताता है। नाटक में कलाकारों ने शानदार अभिनय किया और दर्शकों ने इसकी सराहना की।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) के सभागार में बुधवार को पांच दिवसीय प्रवीण स्मृति नाट्य महोत्सव का शुभारंभ हुआ। बिहार की चर्चित रंग संस्था प्रवीण सांस्कृतिक मंच की ओर से पहले दिन जयशंकर प्रसाद की कहानी पर आधारित नाटक ‘गुंडा’ का मंचन किया गया। नाट्य निर्देशक बिजयेंद्र कुमार टॉक निर्देशित नाट्य मंचन के जरिए कलाकारों ने 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में काशी की पृष्ठभूमि पर केंद्रित एक ऐसे गुंडे की कहानी कहता है, जिसके लिए बलिदान, त्याग व तपस्या ही जीवन के सर्वोपरि मूल्य थे। बाबू नन्हाकू सिंह जिसे लोग गुंडा के नाम से बुलाते थे, उसे नौटंकी व अभिनय का भी बड़ा शौक था।

वर्ष 1781 में काशी डॉक्टर डॉल आंदोलन शुरू हुआ। काशी नरेश चैट सिंह को उनकी माता पन्ना सहित कैद कर लिया जाता। तब गुंडा अकेले ही अंग्रेजों से लड़ने के निकल पड़ते हैं। नाटक के समापन पर अतिथि के रूप में आगरा से आए प्रख्यात नाट्य समीक्षक आलोक पड़ाकर ने कलाकारों के अभिनयन को सराहा। गुंडा की भूमिका में अजीत सिंह को दर्शकों की वाहवाही मिली तो मंच पर राहुल रंजन, अपराजिता कुमारी, श्रीपर्णा चक्रवर्ती, प्रतिमा भारती, कुमार स्पर्श, अभिषेक राज, जफ्फर आलम व डॉ. इंद्रदीप कुमार चंद्रवंशी ने सशक्त अभिनय किया। महोत्सव का शुभारंभ केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर वरिष्ठ रंगकर्मी अतुल यदुवंशी, आलोक नायर आदि मौजूद रहे।

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