DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   उत्तर प्रदेश  ›  प्रयागराज  ›  बेबसी: खाली होने वाले हर बेड के लिए लंबी कतार

प्रयागराजबेबसी: खाली होने वाले हर बेड के लिए लंबी कतार

हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजPublished By: Newswrap
Thu, 22 Apr 2021 11:22 PM
महामारी का इससे बुरा रूप शायद ही देखने को मिले। बेड चाहे डिस्चार्ज होने से खाली हो या किसी के निधन से उसके लिए लंबी कतार लग जाती...
1 / 2महामारी का इससे बुरा रूप शायद ही देखने को मिले। बेड चाहे डिस्चार्ज होने से खाली हो या किसी के निधन से उसके लिए लंबी कतार लग जाती...
महामारी का इससे बुरा रूप शायद ही देखने को मिले। बेड चाहे डिस्चार्ज होने से खाली हो या किसी के निधन से उसके लिए लंबी कतार लग जाती...
2 / 2महामारी का इससे बुरा रूप शायद ही देखने को मिले। बेड चाहे डिस्चार्ज होने से खाली हो या किसी के निधन से उसके लिए लंबी कतार लग जाती...

प्रयागराज वरिष्ठ संवाददाता

महामारी का इससे बुरा रूप शायद ही देखने को मिले। बेड चाहे डिस्चार्ज होने से खाली हो या किसी के निधन से उसके लिए लंबी कतार लग जाती है। स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में ऐसा दृश्य हर रोज देखने को मिल रहा है। अलग-अलग एम्बुलेंस पर अपने परिजनों को दूरदराज से लेकर आए लोग वार्ड ब्वॉय से लेकर डॉक्टर तक गिड़गिड़ाते हुए नजर आ रहे हैं। कोई मरीज को भर्ती करने के लिए बेड मांग रहा है तो कोई भर्ती मरीज की हालत गंभीर होने पर आईसीयू में शिफ्ट करने की गुहार लगा रहा है। ज्यादातर को जवाब मिलता है बेड खाली नहीं है।

गुरुवार दोपहर एसआरएन के परिसर में दर्जनों एम्बुलेंस लगी हुई थीं। मरीजों को भर्ती कराने की जगह नहीं थी। हालात यह था कि कोविड वार्ड के बाहर एक आईसोलेशन वार्ड बनाया गया है। जहां पर संदिग्ध मरीजों को रखा जाता है। यहां पर भी पांव रखने की जगह नहीं मिली। एक कर्मचारी जिनकी कोरोना से जान गई उनकी पत्नी तक को भर्ती कराने में मशक्कत हो रही है। ये हालात केवल एसआरएन के नहीं हैं, बल्कि किसी भी अस्पताल में इतनी बड़ी संख्या में आईसीयू बेड उपलब्ध नहीं है। वेंटिलेटर की संख्या भी पर्याप्त नहीं है। सामान्य दिनों में जहां निजी अस्पतालों में वेंटिलेटर खाली रहते हैं वहीं वर्तमान में हालात यह है कि मरीजों की लाइन लगी है।

क्यों हो रहे हैं हालात बेकाबू

चिकित्सकों का कहना है कि इस बार कोरोना दूसरे ही रूप में दिखाई दे रहा है। सीधे फेफड़ों पर इसका असर पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर जुकाम, बुखार को लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। जांच तभी करा रहे हैं जब हालात बिगड़ जाते हैं। ऐसे में जांच का प्राथमिक चरण में कराना बेहद जरूरी है।

संबंधित खबरें