:नैनो तकनीक से लिवर सिरोसिस का इलाज संभव
Prayagraj News - इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक नई नैनो तकनीक विकसित की है, जो लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में मदद कर सकती है। इस तकनीक में सेलेनियम आधारित नैनोकणों का उपयोग किया गया है, जो शरीर में सीधे कोशिकाओं पर काम करते हैं। यह तकनीक पारंपरिक इलाज की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकती है।

प्रयागराज, अनिकेत यादव। इलाहाबाद विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के वैज्ञानिकों ने एक नई नैनो तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में मदद कर सकती है। इस शोध का नेतृत्व भौतिक विज्ञान की प्रो. प्रतिमा चौहान और रसायन विज्ञान के कमलाकांत बेहेरा ने किया। वैज्ञानिकों ने सेलेनियम आधारित बहुत छोटे-छोटे कण (नैनोकण) बनाए हैं। ये कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि शरीर के अंदर जाकर सीधे कोशिकाओं पर काम कर सकते हैं। यही इनकी सबसे बड़ी खासियत है।यह नई तकनीक शरीर में हानिकारक तत्वों को कम करती है और कोशिकाओं को सुरक्षित रखने में मदद करती है।
शोध में शामिल डॉ. राहुल के अनुसार, इन नैनोकणों से लिवर के बिगड़े हुए एंजाइम्स को फिर से संतुलित करने में मदद मिली। एंजाइम्स शरीर की जरूरी रासायनिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं, और इनके असंतुलित होने से बीमारी बढ़ जाती है। इस तकनीक से एंजाइम्स को सामान्य स्तर पर लाने में अच्छे परिणाम मिले। इसके अलावा, वैज्ञानिकों ने एक खास रुथेनियम आधारित कंपाउंड का भी इस्तेमाल किया। यह कंपाउंड लिवर की कोशिकाओं को नुकसान से बचाता है, जिसे ‘हेपेटोप्रोटेक्टिव’ प्रभाव कहा जाता है। प्रयोगों में यह भी देखा गया कि इससे शरीर में एंटीऑक्सीडेंट का स्तर बढ़ा और हानिकारक तत्व कम हुए। शोध में यह भी पाया गया कि नैनो स्तर पर बने ये कण बहुत सक्रिय होते हैं और शरीर में आसानी से काम करते हैं। छोटे आकार के कारण ये जल्दी कोशिकाओं तक पहुंचते हैं और बेहतर असर दिखाते हैं। इसी वजह से यह तकनीक पारंपरिक इलाज से ज्यादा प्रभावी हो सकती है। हालांकि यह शोध अभी शुरुआती चरण में है, इसलिए इसे आम मरीजों तक पहुंचने में समय लगेगा। लेकिन इसके नतीजे काफी उत्साहजनक हैं। अगर आगे के परीक्षण सफल रहे, तो यह तकनीक लिवर सिरोसिस के इलाज में बड़ा बदलाव ला सकती है। इसका शोध पत्र जर्मनी से प्रकाशित प्रतिष्ठितसाइंसफिट जर्नल नेचर के हालिया अंक में प्रकाशित हुआ है।लिवर सिरोसिस में लिवर धीरे-धीरे होता है खराबवैज्ञानिकों ने बताया कि लिवर सिरोसिस एक ऐसी बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे लिवर खराब होता जाता है और अपनी सामान्य कार्यक्षमता खो देता है। यह बीमारी अक्सर लंबे समय तक शराब के सेवन, हेपेटाइटिस या अन्य कारणों से होती है। जब लिवर सही तरह से काम नहीं करता, तो शरीर में कई तरह की समस्याएं शुरू हो जाती हैं, जिससे मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।भविष्य की दवाओं के विकास में बहुत महत्वपूर्णइस रिसर्च की खास बात यह है कि इसमें भौतिक और जैविक दोनों पहलुओं को जोड़ा गया है। यानी वैज्ञानिकों ने यह समझने की कोशिश की कि पदार्थ की संरचना और उसका शरीर पर प्रभाव कैसे जुड़ा हुआ है। इस तरह का समग्र दृष्टिकोण भविष्य की दवाओं के विकास में बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है।टीम में ये हैं शामिलहरिसिंह गौर विश्वविद्यालय (सागर विश्वविद्यालय) मध्य प्रदेश के प्रो. राज कुमार कोइरी, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिक डॉ. देवव्रत दाश, यूनाइटेड इंस्टिट्यूट की दिव्या बरतरिया, डॉ. राहुल कनौजिया, गुलाम मुस्तफा, डॉ. कमलाकांत बेहेरा, डॉ. शेखर श्रीवास्तव, श्रुति त्रिवेदी, अंबरीश कुमार, अमित जायसवाल, प्रो. प्रतिमा चौहान, रवींद्र कुमार रावत, सूर्य प्रकाश सिंह और दीक्षा शामिल हैं।
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