संतों के साथ बेजुबानों को भी रास आ रही है महाकुम्भ नगरी
Prayagraj News - महाकुम्भ 2025 में नागा संन्यासियों के साथ उनके पालतू जानवरों की भी चर्चा हो रही है। महंत श्रवण गिरि ने अपनी डॉगी लाली की देखभाल के लिए हेल्थ कार्ड बनवाया है। महंत तारा गिरि अपनी प्यारी बिल्लियों सोमा...
महाकुम्भ 2025 की शोभा बढ़ाने के लिए देश के कोने-कोने से नागा संन्यासी प्रयागराज आ चुके हैं। संगम की रेती पर नागा संतों की कठिन साधना तो आम नागरिकों के लिए चर्चा का विषय है ही, लेकिन इनके साथ आए पालतू पशु लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। मध्य प्रदेश के नरसिंह पुर से आए महंत श्रवण गिरि के एक हाथ में जाप की माला रहती है तो दूसरे हाथ में डॉगी लाली का पट्टा। लाली उनके लिए बेजुबान जानवर नहीं, बल्कि साधना का हिस्सा है। महंत श्रवण गिरि बताते हैं कि 2019 के कुम्भ में प्रयागराज से काशी जाते समय रास्ते में उन्हें लाली मिली थी। दो महीने की लाली तब से उनके साथ है। जब वह साधनारत होते हैं तो लाली शिविर के बाहर उनकी रखवाली करती है। इतना ही नहीं लाली का हेल्थ कार्ड भी उन्होंने बनवाया है, जिसमें उसे नि:शुल्क उपचार मिलता है।
श्रीमहंत तारा गिरि की आंखों का तारा है सोमा
गुड़गांव के खेटाबास आश्रम से महाकुम्भ आए जूना अखाड़े के श्री महंत तारा गिरि अपने पेट सोमा के साथ ही अखाड़े के बाहर धूनी रमा रहे हैं। श्री महंत तारा गिरि बताते हैं कि सोमवार के दिन सोमा का जन्म हुआ था, इसलिए इसका नाम सोमा रखा गया। सोमा की देखभाल महंत तारा गिरि की शिष्या पूर्णा गिरि करती हैं। पूर्णा गिरि बताती हैं कि साधु-संतों के कोई परिवार या बच्चे तो होते नहीं हैं ऐसे में सोमा जैसे पेट ही उनकी संतान हैं। सोमा भी उनकी तरह तिलक लगाती है, अपनी जटाएं बंधवाती है। सोमा भी पूरी तरह सात्विक भोजन ग्रहण करती है। पूर्णा गिरि बताती हैं कि जितना समय उन्हें अपनी साधना के लिए तैयार होने में नहीं लगता उससे अधिक सोमा को सजाने संवारने में लगता है।
खरगोश और कबूतर के लिए राधिक वैष्णव की पहचान
महाकुम्भ खाकचौक में महिला संत राधिका वैष्णव का शिविर भी लग रहा है। उनके साथ आए खरगोश, तोते और कबूतर भी आकर्षण का केंद्र है।
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