तीन साल में सर्जरी विभाग के 11 रेजिडेंट डॉक्टर हुए कम
Prayagraj News - प्रयागराज में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के रेजिडेंट डॉ. आदित्य की मौत का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है। प्राचार्य द्वारा गठित जांच टीम रेजिडेंट डॉक्टरों से पूछताछ कर रही है। कॉलेज में पीजी की 25 सीटें हैं, लेकिन रेजिडेंट डॉक्टरों की संख्या 64 है।

प्रयागराता। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग के रेजिडेंट डॉ. आदित्य की मौत का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है। घटना की जांच के बारे में प्राचार्य की ओर से गठित तीन सदस्यीय टीम रेजिडेंट डॉक्टरों से पूछताछ भी कर रही है लेकिन कोई पुख्ता जानकारी अभी नहीं मिल सकी है। मौत का कारण कुछ भी हो लेकिन मेडिकल कॉलेज ने एक भावी सर्जन को खो दिया है। मेडिकल कॉलेज के सूत्रों के अनुसार सर्जरी विभाग में पीजी की 25 सीटें हैं। तीन साल के पीजी में जहां 75 रेजिडेंट डॉक्टर होने चाहिए वहीं इस समय 64 रेजिडेंट सर्जरी विभाग में कार्यरत हैं।
इसमें यदि डॉ. आदित्य की मौत को जोड़ लिया जाए तो 11 रेजिडेंट डॉक्टर सीटों के सापेक्ष कम हैं, जो किसी न किसी कारण से अस्पताल छोड़ चुके हैं। कॉलेज के सर्जरी पीजी प्रथम वर्ष में इस समय 19, द्वितीय वर्ष में 21 और तृतीय वर्ष में 24 रेजिडेंट हैं। इसमें सबसे ज्यादा छह रेजिडेंट डॉक्टर प्रथम वर्ष में कम हैं। मेडिकल कॉलेज की ओर से एक छात्र के एमबीबीएस की पूरी पढ़ाई के समस्त संसाधन का खर्च लगभग एक करोड़ रुपये और पीजी की पढ़ाई में प्रति छात्र औसत दो करोड़ रुपये खर्च होता है। वहीं रेजिडेंट डॉक्टर को प्रतिमाह 1.10 लाख रुपये वेतन भी मिलता है।तीन माह बाद निष्प्रभावी हो जाएगा बिसरा डॉ. आदित्य का पोस्टमार्टम के बाद बिसरा प्रिर्जव जरूर कर लिया गया है। लेकिन सूत्रों के अनुसार जब तक घटना की एफआईआर दर्ज नहीं होगी तब तक प्रिर्जव किए गए बिसरा की भी जांच नहीं होगी। वहीं यदि तीन माह तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो बिसरा का रासायनिक तत्व भी निष्प्रभावी हो जाएगा। डॉ. आदित्य की मौत को लेकर अस्पताल में कई तरह की चर्चाएं हैं। परिवार की ओर से अभी तक अस्पताल को किसी तरह की लिखित शिकायत नहीं प्राप्त हुई है
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