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Hindi News उत्तर प्रदेश प्रयागराजसप्ताहभर बाद दस्तक देगा मानसून, बजबजा रहे नाले

सप्ताहभर बाद दस्तक देगा मानसून, बजबजा रहे नाले

दृश्य एक: स्थान: अटाला गुलाबबाड़ी नाला। समय: दोपहर लगभग एक बजे। पूरा नाला गंदगी से पटा था। नाले के पास पुरानी फ्रीज को काटने का काम होता...

सप्ताहभर बाद दस्तक देगा मानसून, बजबजा रहे नाले
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हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजThu, 20 Jun 2024 10:45 AM
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प्रयागराज। दृश्य एक: स्थान: अटाला गुलाबबाड़ी नाला। समय: दोपहर लगभग एक बजे। पूरा नाला गंदगी से पटा था। नाले के पास पुरानी फ्रीज को काटने का काम होता है। पूरे नाले में इसका फोम भरा था। नगर निगम की टीम पोकलैंड लगाकर सफाई तो कर रही थी, लेकिन जाम नाले से पूरा मलबा नहीं निकल सका। जाम नाला बारिश के मौसम में जलभराव का कारण बन जाता है।
दृश्य दो: स्थान: राजापुर नाला, राजापुर। समय: दोपहर 1:30 बजे। लगभग 800 मीटर लंबा नाला पूरी तरह कीचड़ और सिल्ट से पटा है। यह शहर के सबसे बड़े नालों में एक है। अशोक नगर के एक बड़े हिस्से का और पूरे राजापुर का गंदा पानी इसी नाले से निकलता है तथा हर बार जाम होने के कारण यह नाला जलभराव की बड़ी वजह बनता है।

दृश्य तीन: स्थान: स्टैनली रोड। समय: दोपहर: दो बजे। सिक्स लेन रोड के पास का नाला आज नालीनुमा हो चुका है। इस नाले में पूरे बेली कछार, बेली उपहार और स्टैनली रोड का पानी आता है। जब से सिक्स लेन पुल का काम हो रहा है पूरा नाला आज पटा जा चुका है। स्थिति यह है कि इस बार भी बारिश में बेली गांव में जलभराव होना तय है।

यह तीन नाले तस्वीर बयां कर रहे हैं स्मार्ट सिटी प्रयागराज की। जहां पिछले तीन महीनों से प्रचंड गर्मी के कारण इस बार अच्छा मानसून होने की उम्मीद है। मौसम विज्ञानी जहां एक सप्ताह के भीतर मानसून आने की संभावना प्रकट कर रहे हैं वहीं नगर निगम की नींद अब तक नहीं टूटी है। लोगों के विरोध के बाद पिछले दिनों नगर निगम की टीम नाला सफाई के लिए निकली जरूर, लेकिन खानापूर्ति कर वापस आ रही है। स्थिति यह है कि कहीं 800 मीटर लंबा नाला 100 मीटर साफ हुआ है तो कहीं पूरा का पूरा नाला मलबे से पटा हुआ है। बारिश के दिनों में शहर में जलभराव होना एक बार फिर तय हो गया है।

क्यों साफ नहीं हो सके नाले

ऐसा नहीं है कि हर बार नाला सफाई में लापरवाही होती है। जानकारों का कहना है कि गत वर्ष नगर निगम ने नाला सफाई समय से की और इसमें पूरी तत्परता दिखाई थी लेकिन इस बार नाला सफाई में जबर्दस्त लापरवाही हुई है। इसका बड़ा कारण एक तो पूरी टीम का महाकुम्भ कि तैयारियों में जुटना है और दूसरा बड़ा कारण इस बार चुनाव का होना है। ऐसे में नगर निगम के अफसरों ने शहर के नालों की स्थिति पर विचार नहीं किया और सफाई का टेंडर समय पर नहीं कराया। जिसके चलते इस वक्त स्थिति भयावह बनी हुई है।

बड़े नालों की सफाई न होना अधिक मुसीबत

बड़े नालों की सफाई न होने के कारण मुसीबत अधिक होगी। इसके चलते छोटे नाले जो इन नालों में मिलते हैं वो बैक फ्लो मारेंगे। ऐसे में स्थिति और अधिक खराब होगी। अगर छोटे-छोटे नालों को युद्ध स्तर पर साफ कर भी लिया गया तो जाम बड़े नालों के कारण जलभराव होना लगभग तय है।

स्थिति एक नजर

शहर में बड़े नाले: 105

सफाई के लिए हुआ टेंडर 94

कुल जारी किया बजट 3.10 करोड़

शेष बचे नाले जिनका होना है टेंडर 11

छोटे नाले: 729

सफाई में लगे कर्मचारी 750

सफाई पर किया जा रहा खर्च 2.50 करोड़

वर्जन

नालों की सफाई में इस बार निश्चित ही लापरवाही हुई है। गर्मी बहुत अधिक होने के कारण माना जा रहा है कि मानसून अच्छा रहेगा। ऐसे में अगर युद्धस्तर पर नालों की सफाई का काम न हुआ तो इस बार फिर शहर में बड़े स्तर पर जलभराव होगा, जिससे आम जनमानस परेशान होगा।

राजू शुक्ला, पार्षद, सलोरी

इस वक्त नाला सफाई युद्ध स्तर पर चल रही है। पूरी मशीनरी इस काम में उतार दी गई है। महापौर से लेकर सभी जिम्मेदार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। जून के आखिरी सप्ताह तक सभी नालों को पूरी तरह से साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। जिसे पूरा कर लिया जाएगा।

दीपेंद्र यादव, अपर नगर आयुक्त, प्रभारी नाला सफाई

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