Prayagraj News: हफ्ते में तीन बार कराएं मेडिकल बोर्ड की बैठक, पुनर्गठन भी करें
Prayagraj News: राज्य आयुक्त दिव्यांगजन ने मोबाइल कोर्ट के माध्यम से दिव्यांगों की समस्याएं सुनीं। 131 प्रार्थना पत्रों की सुनवाई हुई और अधिकारियों को समस्या के निस्तारण में लापरवाही पर आर्थिक दंड का आदेश दिया गया। मौके पर दिव्यांग प्रमाणपत्र और सहायक उपकरण भी वितरित किए गए।
Prayagraj News: राज्य आयुक्त दिव्यांगजन प्रो. हिमांशु शेखर झा की अध्यक्षता में बुधवार को सर्किट हाउस के सभागार में मोबाइल कोर्ट लगाकर दिव्यांगों की समस्याओं को सुना गया। मोबाइल कोर्ट के दौरान दिव्यांग प्रमाणपत्र (यूडीआईडी), राशन कार्ड, आवास, आयुष्मान कार्ड, दिव्यांग पेंशन व अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित 131 प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई हुई। राज्य आयुक्त ने कहा कि अगर दिव्यांगों की समस्या का समय से निस्तारण नहीं किया गया और शिकायत आई तो पहली बार में अधिकारी पर 10 हजार रुपये, दूसरी बार में 50 हजार व तीसरी बार में पांच लाख रुपये का आर्थिक दंड लगाएंगे। राज्य आयुक्त ने दिव्यांगों को प्रमाणपत्र जारी होने में आ रही समस्याओं पर सीएमओ पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि नियमानुसार सभी को प्रमाणपत्र दिया जाना चाहिए। जिले में तमाम मामले लंबित होने के कारण निर्देश दिया कि मेडिकल बोर्ड की सप्ताह में तीन दिन बैठक कराकर दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया जाए। उन्होंने तीन वर्ष से अधिक का समय पूर्ण कर चुके सदस्यों को मेडिकल बोर्ड से हटाते हुए 07-08 विशेषज्ञ चिकित्सकों को सम्मिलित कर दिव्यांग प्रमाणपत्र निर्गत करने के लिए मेडिकल बोर्ड को पुनर्गठित किए जाने के लिए कहा।
दिव्यांगों के प्रमाणपत्र
उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से अधिक उम्र के दिव्यांगजन का अस्थायी दिव्यांग प्रमाणपत्र निर्गत न किया जाए। सरकार से इम्पैनल्ड अस्पतालों से प्रस्ताव प्राप्त कर व मुख्य चिकित्सा अधिकारी से अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त कर नियमानुसार विचार करते हुए परीक्षण की सुविधा सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को जनसुनवाई के लिए अलग से समय-सारिणी निर्गत करने के निर्देश दिए।
दिव्यांग ऑइकन नियुक्ति
राज्य आयुक्त ने जिले में विभिन्न क्षेत्र जैसे- खेल, साहित्य, संस्कृति, समाज-सेवा आदि में दिव्यांग ऑइकन नियुक्त कर दिव्यांगजन के सर्वांगीण विकास के लिए प्रोत्साहित किए जाने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी विभाग का कार्यालय ऊपरी तल पर हो तो जैसे संभव भूतल पर कक्ष आवंटित कराते हुए दिव्यांगजनों की समस्याओं की सुनवाई की जाए। मोबाइल कोर्ट के दौरान राज्य आयुक्त ने पात्र दिव्यांगजनों को सहायक उपकरणों का वितरण भी किया गया। 25 श्रवण यंत्र, 10 एमआर किट, तीन व्हीलचेयर व एक स्मार्ट केन दिया गया।
प्रमाणपत्रों का वितरण
मोबाइल कोर्ट के दौरान मौके पर ही 25 दिव्यांगजन को दिव्यांग प्रमाण-पत्र (यूडीआईडी) कार्ड व पांच दिव्यांगजन को अन्त्योदय राशन कार्ड निर्गत किए गए। दिव्यांगजनों के आवास उपलब्ध कराए जाने को परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास विभाग, प्रयागराज को निर्देशित किया गया। श्रवण बाधितों को समझाने के लिए उनकी विशेष शैली में बताने वाले विशेषज्ञ भी मौजूद थे। जैसे ही राज्य आयुक्त ने अपनी बात रखी उसी दौरान एक महिला ने विशेष संकेत वाली शैली में आयुक्त की बात को बताना शुरू किया। जो सभी के लिए काफी मददगार रहा।
दिव्यांगों की समस्याएँ
कोई कंधे पर आया, किसी की छलक पड़ी आंखें
प्रयागराज। मोबाइल कोर्ट के आयोजन के दौरान दिव्यांगों में अपनी बात को मंच पर रखने की होड़ थी। कोई पिता के कंधे पर बैठकर आया तो कोई घिसटते हुए पहुंचा। एक ही अपेक्षा थी कि अफसर उनकी बात सुनें। अगम पांडेय ने बताया कि उसका 50 फीसदी का दिव्यांगता प्रमाणपत्र जारी किया गया है। उसे दिव्यांगता का प्रतिशत बढ़वाना है। क्योंकि वो दोनों पांव से दिव्यांग था। राज्य आयुक्त स्थिति देखकर हैरान हो गए। उन्होंने तत्काल बोर्ड को निर्देश दिया कि उसका परीक्षण कर उचित कार्यवाही करें। यर्थाथ पांडेय ने मेजा के एक निजी स्कूल के प्रबंधक पर आरोप लगाया कि उसे पीटकर विद्यालय से निकाल दिया गया है। अधिकारी ने बीएसए से विद्यालय से आख्या मांगकर उचित कार्रवाई के लिए कहा है। सोरांव के साहिल ने बताया कि प्रमाणपत्र नहीं बन रहा है। उसका प्रमाण पत्र तत्काल जारी कराया। सदर तहसील की एक महिला ने रोते हुए बताया कि उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया है। आयुक्त ने तहसील कार्यालय में जांच कराकर उचित कार्रवाई के लिए निर्देश दिए। कौंधियारा के कृष्णा नंद शुक्ल ने मोटराइल्ड ट्राईसाइकिल, आवास और नल की मांग रखी।
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