कुपोषित बच्चों में खसरा का खतरा अधिक

Mar 16, 2026 08:32 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रयागराज
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Prayagraj News - प्रयागराज में खसरा (मीजल्स) एक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति के छींकने और खांसने से फैलती है। यह बच्चों में गंभीर रूप से कुपोषित होने पर अधिक खतरनाक हो सकती है। बच्चों को खसरा और रूबेला का टीका लगवाना और विटामिन ए की दवा देना जरूरी है।

कुपोषित बच्चों में खसरा का खतरा अधिक

प्रयागराज। खसरा (मीजल्स) एक संक्रामक बीमारी है, जो पैरामायक्सोवायरस समूह के वायरस से फैलता है। यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के छींकने, खांसने, पास आने, छूने या जूठा खाने से तेजी से फैल सकता है। यह वायरस गले व नाक में रहता है व हवा के जरिए दूसरे बच्चों तक पहुंच जाता है। यहां तक कि गर्भावस्था के दौरान संक्रमण होने पर अजन्मे शिशु के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है। गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों में गंभीर खसरा होने की संभावना अधिक होती है। विशेषकर ऐसे बच्चे जिनमें विटामिन ए की कमी है या प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है। चिल्ड्रेन अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीषा मौर्या ने बताया कि बच्चे के जन्म के नौ माह बाद पहला और डेढ़ साल बाद दूसरा खसरा व रूबेला का टीका जरूरी लगवाना चाहिए।

साथ में विटामिन ए की दवा देनी भी जरूरी होती है। संक्रमित बच्चे को अन्य स्वस्थ लोगों से बिल्कुल अलग रखना चाहिए। शरीर में पानी की कमी न होने पाए। बच्चों में तेज बुखार, बहती नाक, गले में खराश, लाल आंखे व मुंह के अंदर सफेद चकत्ते दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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