लातूर के निवासियों की चाहत त्रिवेणी तट पर आकर पूरी
Prayagraj News - प्रयागराज के रामेश्वर गांव के 75 वर्षीय बाला साहेब कराड़ ने महाकुम्भ में स्नान किया और अपने गांव की महिलाओं-पुरुषों के लिए तीर्थाटन की योजना बनाई। 50 गांववाले उनके साथ तीर्थाटन पर निकले और विभिन्न पवित्र स्थलों का दर्शन किया। उनकी यात्रा मकर संक्रांति पर्व पर त्रिवेणी संगम में स्नान से शुरू हुई।

प्रयागराज। ध्रुव शंकर तिवारी महाराष्ट्र के लातूर जिले के सौ निवासियों की आबादी के आग्रह पर रामेश्वर गांव के सबसे सम्मानित 75 वर्षीय बाला साहेब कराड़ महाकुम्भ में बसंत पंचमी शाही स्नान पर्व पर संगम में डुबकी लगाने पहुंचे थे। डुबकी लगाकर उन्होंने बीस-बीस लीटर के दो गैलन में त्रिवेणी का जल भरा और वापस अपने गांव लौट गए। उनका संकल्प था गांव की सभी महिलाओं व पुरुषों को जल देकर वर्ष 2026 में तीर्थाटन कराने का। बाला साहेब की चाहत को पूरा करने के लिए गांव के पचास लोग तीर्थाटन पर निकले और उसके अहम पड़ाव में मकर संक्रांति पर्व पर त्रिवेणी में एकसाथ स्नान किया।
गांव के आधे निवासियों की तीर्थाटन यात्रा 25 दिसंबर को शुरू हुई थी। जोकि पहली बार अपने गांव से बाहर निकले थे। बाला साहेब गांव में ही रुक गए तो उनके भाई ज्ञानदेव ने यात्रा की अगुवाई की। एक बस किराए पर ली और यात्रा के क्रम में सबसे पहले सभी रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग जाकर दर्शन-पूजन किया। वहां से तिरुपति बालाजी, जगन्नाथपुरी और काशी विश्वनाथ होते हुए 14 जनवरी को प्रभु श्रीराम का दर्शन करने के लिए अयोध्या पहुंचे। अयोध्या से चलकर मकर संक्रांति पर्व पर स्नान करने के लिए सभी दशाश्वमेध मंदिर के बगल में स्थित एक होटल में रुके। फिर पचास निवासियों का समूह गंगा मैया की जय व जय श्रीराम का उद्घोष करते त्रिवेणी संगम का स्नान करने के लिए चलते रहे। ज्ञानदेव ने बताया कि भइया की चाहत को पूरा करने के लिए हम सभी तीर्थाटन पर निकले है। जिसकी प्रेरणा पवित्र संगम के जल से गांव वालों को मिली है। अब यहां से भगवान का दर्शन करने चित्रकूट जाना है, वहां से सतना जिले में माता मैहर का दर्शन करना है। तीर्थाटन का अंतिम दर्शन उज्जैन में बाबा महाकाल का करना है।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


