
लोक आस्था और दर्शन के संवाद का केंद्र है माघ मेला
Prayagraj News - प्रयागराज में एनसीजेडसीसी में आयोजित शब्द-ब्रह्म संगोष्ठी के चौथे दिन 'साहित्यिक संचेतना का तीर्थ' विषय पर चर्चा हुई। मुख्य वक्ता डॉ. सरोज सिंह ने माघ मेले की साहित्यिक महत्ता पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी में ब्रह्मनाद प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। साथ ही, पद्मश्री बाबा योगेंद्र की 102वीं जयंती मनाई गई।
प्रयागराज, संवाददाता। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) में चल रही शब्द-ब्रह्म संगोष्ठी के अंतर्गत चौथे दिन ‘साहित्यिक संचेतना का तीर्थ’ विषय पर व्याख्यान हुआ। मुख्य वक्ता साहित्यकार डॉ. सरोज सिंह ने कहा कि माघ मेला लोक आस्था, साहित्य और दर्शन के संवाद का केंद्र बना हुआ है। इसका साहित्यिक महत्व उसके पौराणिक संदर्भों, सांस्कृतिक विरासत व धार्मिक ग्रंथों में स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होता है। प्रयाग से ही उस परंपरा का अभिलेखिक साक्ष्य मिलता है, जहां दर्शन, स्नान व देह-त्याग के माध्यम से मोक्ष की संकल्पना विकसित हुई है। दूसरे वक्ता अजीत प्रताप सिंह ने कहा कि प्रयागराज को साहित्यिक संचेतना का तीर्थ कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं है बल्कि यह संपूर्ण विश्व की साहित्यिक, सांस्कृतिक व आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है।
संगोष्ठी के बाद ब्रह्मनाद प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। जिसके अंतर्गत वादन विधा में बीस प्रतिभागियों ने सितार, बांसुरी, ऑक्टोपैड व तबला पर आकर्षक प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान पद्मश्री बाबा योगेंद्र की 102वीं जयंती के अवसर पर केंद्र की ओर से पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ। केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा व अन्य लोगों ने पद्मश्री के चित्र पर पुष्प अर्पित करते हुए उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को नमन किया। इस मौके पर प्रभाकर त्रिपाठी, डॉ. श्लेष गौतम, शैलेंद्र मधुर, मनोज गुप्त, कल्पना सहाय आदि मौजूद रहे।

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