सनातनी किन्नर अखाड़े की आचार्य बनीं कौशल्यानंद गिरि
Prayagraj News - प्रयागराज में किन्नर अखाड़े से अलग हुए संतों ने नवगठित सनातनी किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि का विधिविधान से पट्टाभिषेक किया। उन्होंने कहा कि अखाड़ा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार करना है और समाज के हाशिये पर रहने वालों को मुख्यधारा में लाना है।
प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। किन्नर अखाड़े से अलग हुए संतों ने नवगठित सनातनी किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर पद पर कौशल्यानंद गिरि का मंगलवार को विधिविधान के साथ पट्टाभिषेक कर दिया। इस दौरान किन्नर समाज के साधु संतों की मौजूदगी में सभी ने चादर ओढ़ाकर नए आचार्य को मान्यता दी। पट्टाभिषेक के तत्काल बाद आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि ‘टीना मां’ ने कहा कि अखाड़ा गठन का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म का प्रचार करना है। जो भी सनातन धर्म का विरोधी है, उससे हमारा बैर है। हम समाज से अलग हुए लोगों को मुख्य धारा से जोड़ने, गाय को राष्ट्र माता घोषित कराने और भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए काम करेंगी।

इसके पूर्व सुबह 10 बजे बैरहना बंगाली टोला अखाड़ा मुख्यालय से नवगठित अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कौशल्यानंद गिरि ‘टीना मां’, गौरी मां व अन्य किन्नर संत संगम तट पहुंचीं। जहां विधिविधान से पूजन व अभिषेक के बाद सभी ने स्नान किया और फिर कार्यक्रम स्थल पर आए। पहले वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजन हुआ। इसके बाद आचार्य को छत्र और चवण प्रदान कर किन्नर समाज के संतों ने उन्हें फूलों से लादा और फिर चादर ओढ़ाकर उनका सम्मान किया। वाराणसी से आए लोगों ने एक साथ कई डमरू बजाए और इस बीच आचार्य के नाम के जयकारे गूंजते रहे। मंगलवार को हुए कार्यक्रम में संजनानंद गिरि को महामंडलेश्वर व संध्यानंद गिरि को श्रीमहंत की उपाधि भी दी गई। कार्यक्रम में कानपुर से मन्नत, जौनपुर से बरखा, भवानी, दयालपुर, पूर्व पार्षद पवन श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

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