इच्छाओं पर संयम रखना ही वास्तविक सुख होता है : जैन मुनि सागर
जीरो रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा का आयोजन हुआ। जैन मुनि सागर ने कहा कि जैन धर्म अपरिग्रह और संतोष का संदेश देता है। इच्छाओं के अनियंत्रित विस्तार के कारण मानसिक शांति का अभाव है। युवाओं को सकारात्मक चिंतन और नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया गया। भक्तामर स्तोत्र विधान का आयोजन भी हुआ।
जीरो रोड स्थित दिगंबर जैन मंदिर में रविवार को धर्मसभा का आयोजन हुआ। जैन मुनि सागर ने कहा कि जैन धर्म अपरिग्रह और संतोष का संदेश देता है। जीवन में जितना अधिक संग्रह बढ़ता है, उतना ही चिंताएं भी बढ़ती हैं। आज विज्ञान और तकनीक ने मनुष्य को असीमित सुविधाएं प्रदान की हैं लेकिन इसके बावजूद संतुष्टि और मानसिक शांति का अभाव दिखाई देता है। इसका प्रमुख कारण इच्छाओं का अनियंत्रित विस्तार है। इसलिए जब तक इच्छाओं पर संयम नहीं होगा, तब तक मनुष्य को वास्तविक सुख की अनुभूति संभव नहीं है। मुनि अतुल ने कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति दूसरों से आगे निकलने की दौड़ में स्वयं को ही पीछे छोड़ता जा रहा है।
मुनि ने युवाओं को अपने लक्ष्य निर्धारित कर सकारात्मक चिंतन, अनुशासन व नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस दौरान आयोजित प्रश्न मंच में धर्म व जैन संस्कृति से जुड़े प्रश्न पूछे गए। सही उत्तर देने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। जैन अनुयायियों ने शाम को भक्तामर स्तोत्र विधान का आयोजन किया। साथ ही विश्व शांति, सामाजिक सद्भाव व मानव कल्याण की भावना से शांतिधारा की गई।
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