कुम से कुम्भनगरी आए मौलाना नहीं लौट पा रहे ईरान
Prayagraj News - प्रयागराज में रमजान के दौरान नमाज पढ़ाने आए ईरानी मौलाना परिवार की चिंता में हैं। खाड़ी युद्ध के कारण वे न तो कुम लौट पा रहे हैं और न ही परिवार को बुला पा रहे हैं। ईरान में हमलों के चलते उनकी चिंताएँ बढ़ गई हैं। ईरानी दूतावास से अनुमति मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं।

प्रयागराज। रमजान के महीने में शिया मस्जिदों में नमाज पढ़ाने ईरान की धार्मिक नगरी कुम से कुम्भ नगरी आए मौलानाओं को अब परिवार की चिंता सताने लगी है। खाड़ी युद्ध जारी रहने की वजह से ये न तो कुम लौट पा रहे हैं और न ही वहां रह रहे अपने परिवार के लोगों को प्रयागराज बुला पा रहे हैं। रानी मंडी की मस्जिद में नमाज पढ़ाने के लिए कुम से आए मौलाना यासीर ने बताया कि यहां आने के समय सबकुछ सामान्य था। इसी वजह से पत्नी और दो साल के बेटे को कुम में छोड़कर यहां आए। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला किया।
ईरान ने भी पलटवार किया। उम्मीद थी कि युद्ध जल्द समाप्त होगा। कुम से प्रयागराज आने के साथ 31 मार्च को वापसी का हवाई टिकट लिया था। बताया कि पहले ईरान की राजधानी तेहरान पर हमले हो रहे थे। अब ईरान के अन्य शहरों के साथ कुम पर भी हमला होने के बाद परिवार को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरान से विमान सेवा ठप है। परिवार को यहां वापस बुलाने के लिए ईरान में भारतीय दूतावास से अनुमति मांगी थी, जो अभी तक नहीं मिली।रानीमंडी के मूल निवासी मौलाना यासीर कहते हैं कि ईरान में मेडिकल की पढ़ाई करने गए छात्रों को सरकार की मदद से भारत वापस लाया गया। अब आर्मेनिया होकर आवागमन हो रहा है पर विमान का किराया तीन गुना महंगा हो गया है। हर वर्ष की भांति रमजान के पहले यासीर के साथ और पांच मौलाना प्रयागराज आए और अब वापसी को लेकर चिंतित हैं। खास बात यह है कि धार्मिक शिक्षा के लिए कुम में रह रहे सभी मौलाना का मूल निवास प्रयागराज में है। अब अपने परिवार के साथ कुम में रह रहे हैं। यही वजह है कि वे अपने-अपने परिवार को लेकर चिंतित हैं।
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