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शिक्षिका पर यौन उत्पीड़न, धर्मांतरण का आरोप लगाने वाले छात्र की जांच का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के एक चर्चित मामले में स्कूल शिक्षिका पर यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण का आरोप लगाने वाले छात्र की जांच साइबर सेल से...

शिक्षिका पर यौन उत्पीड़न, धर्मांतरण का आरोप लगाने वाले छात्र की जांच का आदेश
हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजSat, 25 May 2024 01:00 AM
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर नगर के एक चर्चित मामले में स्कूल शिक्षिका पर यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण का आरोप लगाने वाले छात्र की जांच साइबर सेल से कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कमिश्नर पुलिस कानपुर नगर को निर्देश दिया है कि वह प्रकरण की जांच साइबर सेल को स्थानांतरित करें और साइबर सेल इस बात की जांच करें कि क्या छात्र ने शिक्षिका के मोबाइल नंबर से फेक आईडी बनाई थी। कोर्ट ने इस मामले में शिकायतकर्ता छात्र के पिता को बेटे का मोबाइल फोन पुलिस को सौंपने का निर्देश दिया है। कैंट कानपुर नगर स्थित एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी माध्यम स्कूल के प्रिंसिपल की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने दिया है।

याची प्रिंसिपल का कहना था कि वह एक प्रतिष्ठित स्कूल का प्रिंसिपल है। जिसमें शिकायतकर्ता का बेटा दसवीं का छात्र है। शिकायतकर्ता ने 156(3) के तहत प्राथमिक की दर्ज कराई थी कि स्कूल की एक शिक्षिका छात्र पर यौन संबंध बनाने और धर्म परिवर्तन करने का दबाव डाल रही है। शिकायतकर्ता का कहना था कि अपने बेटे के मोबाइल फोन को चेक करते समय उसको इस बात की जानकारी हुई। बाद में आरोपियों ने इस चैट को सोशल मीडिया में वायरल कर दिया और कुछ न्यूज़ चैनलों में भी इसे दिखाया गया। इस संबंध में बाल कल्याण समिति से भी शिकायत की गई मगर कुछ हुआ नहीं।

याची प्रिंसिपल का कहना था कि मामले की जानकारी होने के बाद प्रिंसिपल ने एक स्वतंत्र जांच कमेटी गठित की। जिसमें एक सेवानिवृत पीसीएस अधिकारी एक अन्य विद्यालय के प्रिंसिपल और एक कर्मचारी शामिल थे। इस कमेटी की जांच में सामने आया कि स्कूल के एक डांस फंक्शन में शिकायतकर्ता के बेटे ने शिक्षिका का फोन नंबर लिया था। और बाद में उसकी फर्जी आईडी बना करके चैटिंग करने लगा। वह शिक्षिका पर मानसिक दबाव भी बना रहा था। जब मामला उछला तो छात्र ने शिक्षिका पर आरोप लगाने शुरू कर दिए। जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि छात्र भले ही नाबालिक है मगर वह मानसिक रूप से काफी मजबूत है और दूसरों पर हावी होने में सक्षम है।

कोर्ट ने प्रिंसिपल की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए कहा कि प्रिंसिपल का नाम प्राथमिक में शामिल नहीं है। उल्टे मामले की जानकारी होने पर उन्होंने जांच का आदेश भी दिया और कमेटी गठित की । कोर्ट ने कमिश्नर पुलिस कानपुर नगर को निर्देश दिया है कि इस मामले की जांच साइबर सेल को स्थानांतरित करें और छात्र की भूमिका की जांच कराएं कि क्या वास्तव में छात्र ने शिक्षिका के मोबाइल फोन से कोई फेक आईडी बनाई है। कोर्ट ने छात्र के पिता को उसका मोबाइल फोन पुलिस को सौंपने का निर्देश दिया है।

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