‘एचआईवी से लड़ाई के साथ मजबूत करना होगा प्रतिरक्षा तंत्र’
संक्षेप: Prayagraj News - मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में 'इम्यूनोकॉन 2025' सम्मेलन का उद्घाटन हुआ। प्रो. आरएस वर्मा ने कहा कि एचआईवी अब केवल दवा पर निर्भर नहीं है, बल्कि प्रतिरक्षा-तंत्र के पुनर्निर्माण पर भी ध्यान दिया जाएगा। इस सम्मेलन का उद्देश्य बायोमेडिकल नवाचारों को नई दिशा देना है।
मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) में भारतीय प्रतिरक्षा विज्ञान समाज (आईआईएस) के सहयोग से आयोजित चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘इम्यूनोकॉन 2025’ का उद्घटन बुधवार को हुआ। संस्थान के निदेशक प्रो. आरएस वर्मा, आईआईएस के अध्यक्ष प्रो. अमित अवस्थी, चेयरमैन प्रो. शिवेश शर्मा, संयोजक डॉ. अंबक कुमार राय तथा सह-संयोजक डॉ. समीर श्रीवास्तव ने दीप जलाकर शुरुआत की। उद्घाटन सत्र में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के मेडिकल बायोलॉजी एंड इम्यूनोलॉजी विभाग की प्रो. सत्या डांडेकर ने कहा कि 2024 में पूरी दुनिया में लगभग पांच करोड़ लोग एचआईवी संक्रमित थे। जबकि 13 लाख नए संक्रमण सामने आए हैं। साफ है आज भी यह गंभीर चुनौती है।

एचआईवी के खिलाफ लड़ाई अब केवल दवा पर निर्भर नहीं रहेगी बल्कि प्रतिरक्षा-तंत्र का पुनर्निर्माण उपचार को आसान बनाएगा। क्योंकि एचआईवी प्रतिरक्षा-तंत्र को अंदर से ध्वस्त करने वाला शत्रु है। एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) ने एचआईवी नियंत्रण का नया युग खोला है। लेकिन यह भी वायरस को समाप्त नहीं कर पाती। अब एडवांस कांबिनेशन थेरेपी (एसीटी) की मदद से वायरस-नियंत्रण और प्रतिरक्षा-तंत्र की पुनर्स्थापना पर उपचार केंद्रित किा जा रहा है। मुख्य अतिथि एवं संस्थान के निदेशक प्रो. आरएस वर्मा ने कहा कि यह सम्मेलन प्रतिरक्षा विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के मध्य एक सशक्त सेतु का निर्माण करते हुए भविष्य के बायोमेडिकल नवाचारों को नई दिशा प्रदान करेगा। आईआईटी बॉम्बे के डॉ. राहुल पुरवार ने टी-सेल थेरेपी और कैंसर उपचार से संबंधित नवीनतम शोधों और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की। इसके बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, यूएसए की प्रोफेसर वाली पुलिंदरा ने सिस्टम वैक्सीनोलॉजी के क्षेत्र में उभरते दृष्टिकोणों और वैश्विक शोध प्रगति पर जानकारी दी। कार्यक्रम के चेयरमैन प्रो. शिवेश शर्मा ने प्रतिभागियों का स्वागत किया। संयोजक डॉ. अंबक कुमार राय ने सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रो. अमित अवस्थी ने आईआईएस के इतिहास, उपलब्धियों और वैज्ञानिक समुदाय में इसके योगदान पर चर्चा की। सह संयोजक प्रो. समीर श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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