विकसित समाज में स्त्री शोषण की पीड़ा नाटक ‘दीक्षा’ में दिखी
Prayagraj News - राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा भारत रंग महोत्सव का शुभारंभ हुआ। पहले दिन नाटक 'दीक्षा' का प्रदर्शन हुआ, जिसमें रामायण की कहानी को समकालीन दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों ने अहम विषयों जैसे स्त्री शोषण और नैतिक मूल्यों के क्षरण को दर्शाया।
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) नई दिल्ली व उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) की ओर से बुधवार को पांच दिवसीय भारत रंग महोत्सव का आगाज हुआ। केंद्र के सभागार में मुख्य अतिथि गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक शोध संस्थान के निदेशक प्रो. योगेंद्र प्रताप सिंह व केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलित कर महोत्सव का शुभारंभ किया। पहले दिन पद्मश्री से सम्मानित नरेंद्र कोहली के उपन्यास ‘दीक्षा’ पर आधारित उसकी नाट्य प्रस्तुति हुई। यह प्रस्तुति रंग संस्था दर्पण, गोरखपुर के कलाकारों ने स्व. आलोक चटर्जी को श्रद्धांजलि स्वरूप अर्पित की। जिन्होंने नाटक का निर्देशन किया था। नाटक में रामायण की पारंपरिक गरिमा को बनाए रखते हुए कथा को समकालीन संदर्भों में दिखाया गया तो कलाकारों ने विशेष रूप से अहिल्या प्रसंग को आधुनिक दृष्टि से नए आयामों में प्रस्तुत किया।
अहिल्या के जरिए विकसित समाज में स्त्री शोषण की पीड़ा को प्रभावी रूप से दर्शाया गया। साथ ही जम्बूद्वीप में फैली राक्षसी प्रवृत्तियों, नैतिक मूल्यों के क्षरण और आंतक के वातावरण के संदर्भ में कोशल व मिथिला के बीच संबंधों को प्रमुखता दी। विश्वामित्र की भूमिका में शरद श्रीवास्तव, राम के रूप में आलोक कुमार सिंह, अहिल्या के रूप में आकांक्षा, लक्ष्मण के रूप में राज मौर्य व सीता के किरदार में ऋतिका सिंह के अभिनय को दर्शकों की सराहना मिली। केंद्र के निदेशक ने मुख्य अतिथि, दर्पण संस्था के अध्यक्ष रवि खरे व मप्र स्कूल ऑफ ड्रामा के निदेशक मानवेंद्र त्रिपाठी को पौधा देकर सम्मानित किया।
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