नि:शुल्क डायलिसिस सेवा जरूरतमंदों के लिए संजीवनी
Prayagraj News - प्रयागराज में बदलती जीवनशैली के कारण किडनी रोग की समस्या बढ़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि जब किडनी 80-90% खराब हो जाती है, तो डायलिसिस की आवश्यकता होती है। कॉल्विन और बेली अस्पताल में नि:शुल्क डायलिसिस सेवा शुरू की गई है, जो गरीब मरीजों के लिए मददगार साबित हो रही है।
प्रयागराज। बदलती जीवनशैली के कारण किडनी रोग की समस्या बढ़ती जा रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, जब किडनी 80 से 90 फीसदी तक खराब हो जाती है व शरीर से गंदगी बाहर नहीं निकाल पाती तब डायलिसिस करने की जरूरत पड़ती है। लेकिन यदि डायलिसिस शुरू होती है तो उस मरीज को अधिकतर उसी पर निर्भर होना पड़ता है। कॉल्विन और बेली अस्पताल में 2018 में पीपीपी मॉडल पर नि:शुल्क डायलिसिस सेवा शुरू की गई थी, जो गरीब मरीजों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। क्योंकि निजी अस्पताल में एक माह में लगभग एक लाख रुपये डायलिसिस कराने में खर्च आता है।
...अप्रैल तक दो बेड और बढ़ा दिए जाएंगेकॉल्विन अस्पताल के प्रबंधक वैभव सक्सेना ने बताया कि कॉल्विन की डायलिसिस यूनिट में इस समय 18 बेड हैं, जबकि मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अप्रैल तक दो बेड और बढ़ा दिए जाएंगे। यूनिट में हर माह लगभग 1400 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। अस्पताल में हर माह 50 मरीज प्रतीक्षा सूची में रहते हैं।बेली में हर माह 1300 मरीजों की डायलिसिसबेली अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर मरीजों की नि:शुल्क डायलिसिस की जाती है। अस्पताल की यूनिट में 16 बेड हैं, इसमें 14 बेड पॉजिटिव और दो बेड संक्रमित मरीजों के लिए है। हर माह लगभग 1300 मरीजों की डायलिसिस होती है। अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. भावना शर्मा ने बताया कि यूनिट में बेड की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया है, जल्द की यूनिट का विस्तार होगा।किडनी के हर चौथे मरीज को डायलिसिस की जरूरतमोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद गुप्ता ने बताया कि ओपीडी प्रतिदिन 100 से 120 मरीज आते हैं। इसमें 40 फीसदी मरीजों को डायलिसिस की जरूरत होती है। अस्पताल में डायलिसिस की 15 मशीनें है, जिसमें 13 क्रियाशील हैं। एक माह में लगभग 1200 मरीजों की डायलिसिस की जाती है। अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट शुरू होने पर मरीजों को दूसरे शहरों में नहीं जाना पड़ेगा।
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