सराफा बाजार में बेचैनी, कारोबारी बोले-दुकानें चलेंगी तभी बचेगा रोजगार
प्रयागराज में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीदने की अपील का असर सराफा बाजार में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। व्यवसायियों का कहना है कि यदि खरीदारी में कमी आई, तो ज्वेलरी कारोबार और उससे जुड़े परिवारों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। मंगलवार को बाजार में ग्राहकों की संख्या कम रही।
प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीद को लेकर की गई अपील का असर अब सराफा बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। शहर के बड़े शोरूम से लेकर छोटे ज्वेलरी कारोबारियों तक के बीच बेचैनी बढ़ गई है। कारोबारियों का कहना है कि यदि सोने की खरीदारी लगातार घटती रही तो सिर्फ ज्वेलरी कारोबार ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ेगा। मंगलवार को सिविल लाइंस, चौक और मीरगंज के सराफा बाजारों में ग्राहकों की संख्या कम दिखाई दी। कई दुकानों में व्यापारी पूरे दिन ग्राहकों का इंतजार करते रहे। पुराना सोना बदलकर नया लेने का सुनहरा मौका
सराफा बाजार में ग्राहकों की कमी
सिविल लाइंस स्थित बड़े ज्वेलरी शोरूम के संचालक अजमत सिद्दीकी ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियां हमेशा नकारात्मक नहीं रहतीं, समय के साथ हालात बदलते हैं। उन्होंने कहा कि अभी भी लोगों के पास पुराना सोना बदलकर नया गहना लेने का अच्छा अवसर है। उन्होंने बताया कि बड़े शोरूम चलाने में रोजाना भारी खर्च होता है। बिजली बिल, मकान किराया, मेंटेनेंस और कर्मचारियों का वेतन हर महीने देना पड़ता है। उनके शोरूम में मैनेजर समेत दर्जनों कर्मचारी काम करते हैं। उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह नहीं कि कारोबारी घबरा जाएं, क्योंकि ज्वेलरी इंडस्ट्री बहुत बड़ी है और सरकार भी इस विषय पर जरूर विचार करेगी। फिलहाल पुराने गहनों के एक्सचेंज से बाजार को कुछ सहारा मिल सकता है।
दुकान बंद हुई तो चाय वाले तक पर असर पड़ेगा
राणा ज्वेलर्स के संचालक पंकज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील का असर बाजार में दिखने लगा है। उन्होंने बताया कि ज्वेलरी कारोबार अकेले दुकानदार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई दूसरे रोजगार भी जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनकी दुकान पर 14 लोगों का स्टाफ काम करता है। कर्मचारियों की सैलरी, बिजली बिल, मेंटेनेंस और अन्य खर्च मिलाकर हर महीने दो से तीन लाख रुपये तक का खर्च आता है। दुकान पर आने वाले ग्राहकों के लिए चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक और नाश्ते की व्यवस्था रहती है, जिससे छोटे दुकानदारों और सप्लाई करने वालों को भी रोजगार मिलता है। उन्होंने कहा कि यदि बिक्री पांच से दस लाख रुपये रोज नहीं हुई तो खर्च निकालना मुश्किल हो जाएगा। उनका कहना है कि बाजार को अभी उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस स्थिति का कोई विकल्प जरूर निकालेगी।
छोटे दुकानदारों के लिए मुश्किल की घड़ी
जॉनसनगंज चौराहे स्थित भोला संस ज्वेलर्स के संचालक सुनील वर्मा ने कहा कि सोना और चांदी की बढ़ती कीमतों से बाजार पहले से ही मंदी की स्थिति में था। युद्ध जैसे हालात के बाद उम्मीद थी कि कीमतों में गिरावट आएगी और बाजार संभलेगा, लेकिन प्रधानमंत्री की अपील के बाद कारोबारियों की चिंता और बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी छोटे दुकानदार का न्यूनतम खर्च 50 हजार रुपये महीना होता है। इसमें किराया, बिजली बिल, कारीगरों का भुगतान, लेबर चार्ज और मेंटेनेंस शामिल है। यदि यही हालात लंबे समय तक रहे तो छोटे दुकानदारों को अपनी बचत खर्च करनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के कारण छोटे कारोबारी लंबे समय तक ऐसे हालात में टिक नहीं पाएंगे।
कारोबारियों की सरकार से अपील
सराफा कारोबारियों का कहना है कि यदि खरीदारी लगातार घटती रही तो बाजार में बड़े स्तर पर रोजगार प्रभावित होगा। उनका कहना है कि सरकार को छोटे व्यापारियों की चिंता करते हुए सोना तस्करी पर सख्ती करनी चाहिए, ताकि वैध कारोबार को राहत मिल सके। कारोबारियों का कहना है कि बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल है और सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
पहले ही दिन बाजार में ग्राहक कम
प्रधानमंत्री की अपील के बाद प्रयागराज के सराफा बाजार में पहले ही दिन असर दिखाई देने लगा। सिविल लाइंस और चौक के बाजारों में मंगलवार को सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम भीड़ रही। सिविल लाइंस में करीब 47 बड़े शोरूम हैं, जबकि चौक और मीरगंज इलाके में छोटे-बड़े मिलाकर हजारों सराफा प्रतिष्ठान और कारीगर काम करते हैं। व्यापारियों के मुताबिक मंगलवार को कई दुकानों में पूरे दिन ग्राहक नहीं पहुंचे। कारोबारियों का कहना है कि बाजार पहले से ही दबाव में था और अब फुटफॉल कम होने से स्थिति और गंभीर हो सकती है। उनका कहना है कि यदि यही हाल रहा तो कई प्रतिष्ठानों के सामने बंद होने की नौबत आ सकती है。
सामान्य प्रश्न
लेखक के बारे में
Piyush Kumar Srivastavaशॉर्ट बायो: पीयूष श्रीवास्तव पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में ‘हिन्दुस्तान’ प्रयागराज में रेलवे, रोडवेज, एयरवेज, बिजली और बिजनेस की रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
परिचय एवं अनुभव
पीयूष श्रीवास्तव भारतीय प्रिंट व डिजिटल मीडिया जगत का एक प्रतिष्ठित नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में पीयूष ‘हिन्दुस्तान’ अखबार व ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में बिजनेस, बिजली व परिवहन की खबरों को देख रहे हैं। 2015 से इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने डिजिटल कंटेंट के बदलते ट्रेंड्स और पाठकों की रुचि पर मजबूत पकड़ बनाई है।
करियर का सफर
पीयूष श्रीवास्तव ने अपने करियर की शुरुआत दिसंबर 2007 में ‘आई नेक्स्ट, दैनिक जागरण’ अखबार से की थी। इस दौरान क्राइम की खबरों पर महारत हासिल की। जून 2015 में ‘हिन्दुस्तान’ अखबार प्रयागराज में सेवाएं देना शुरू किया। 2015 से 2024 तक क्राइम की रिपोर्टिंग की। वर्तमान में रेलवे, रोडवेज और एयरवेज के साथ ही बिजली और अर्थ-व्यापार से जुड़ी खबरें लिख रहे हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। स्टेट यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री ली। उसी वक्त से लगातार प्रिंट मीडिया में सक्रिय रहे हैं। शुरूआती दौर में क्राइम रिपोर्टिंग और अब रेलवे, रोडवेज, एयरवेज के साथ ही बिजली, बिजनेस और परिवहन की रिपोर्टिंग कर रहे हैं।
रिपोर्टिंग और विजन
बिजली, परिवहन, बिजनेस, क्राइम की गतिविधियों की खबरों के साथ ही माघ मेला व कुम्भ मेला में रिपोर्टिंग का पीयूष श्रीवास्तव का लंबा अनुभव है। वर्ष 2025 में प्रयागराज में आयोजित सबसे बड़े धार्मिक आयोजन महाकुम्भ के दौरान रिपोर्टिंग टीम का नेतृत्व कर महाकुम्भ की कई स्पेशल स्टोरी की। 2013 के महाकुम्भ और 2019 के कुम्भ की रिपोर्टिंग का भी अनुभव है। पीयूष का मानना है कि सत्य, पारदर्शिता और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए जनता की आवाज़ को सशक्त मंच देना ही पत्रकार का मुख्य दायित्व है।
विशेषज्ञता
प्रयागराज के चर्चित उमेश पाल हत्याकांड की रिपोर्टिंग का अनुभव।
प्रयागराज के चर्चित अतीक-अशरफ हत्याकांड की खास रिपोर्टिंग।
रेलवे, रोडवेज और एयरवेज की खबरों पर पैनी नजर।
जीएसटी के जानकार, व्यापारियों की समस्याओं की गहरी समझ।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


