आईआईएम बैंगलोर से करें डिजिटल बिज़नेस और एंटरप्रेन्योरशिप में बीबीए
प्रयागराज में आईआईएम बैंगलोर ने बीबीए (डीबीई) प्रोग्राम के तीसरे बैच के लिए आवेदन शुरू किए हैं। यह ऑनलाइन कोर्स एंटरप्रेन्योरियल सोच और टेक्नोलॉजी से जुड़ी स्किल्स का अध्ययन करने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए है। 30 जून तक आवेदन आमंत्रित हैं।

प्रयागराज। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट बैंगलोर (आईआईएमबी) ने अपने अंडरग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम, बीबीए (डीबीई) इन डिजिटल बिज़नेस एंड एंटरप्रेन्योरशिप के तीसरे बैच के लिए एप्लीकेशन शुरू कर दिए हैं। यह ऑनलाइन कोर्स उन विद्यार्थियों के लिए तैयार किया गया है जो एकसाथ मैनेजमेंट की बुनियाद, एंटरप्रेन्योरियल सोच और टेक्नोलॉजी से जुड़ी स्किल्स का अध्ययन करना चाहते हैं। आईआईएम बैंगलुरु ने बीबीए (डीबीई) कार्यक्रम के तीसरी बैच के लिए 30 जून तक आवेदन आमंत्रित किए हैं। पिछले दिनों प्रयागराज में आयोजित प्रेस कान्फ्रेंस में प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर अर्चना श्रीवास्तवव ने बताया कि ऐसे समय में जब नई टेक्नोलॉजी, बदलते बिज़नेस मॉडल और वेंचर क्रिएशन की ग्रोथ से करियर और ऑर्गनाइजेशन को नया आकार मिल रहा है, इस प्रोग्राम का मकसद स्टूडेंट्स को ऐसी दुनिया के लिए तैयार करना है जिसमें मैनेजमेंट की जानकारी को प्रैक्टिकल और तेज़ी से बदलते हालात में इस्तेमाल करना होगा। भारत में ऐसे अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम जो इन चीज़ों को पूरी तरह और स्ट्रक्चर्ड तरीके से जोड़ते हैं, वे काफ़ी कम हैं।
प्रोग्राम की प्रतिक्रिया
इस प्रोग्राम को शुरू से ही अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। पहले दो बैच में, इसमें 29 राज्यों के 400 से ज़्यादा शहरों से 2,000 से ज़्यादा लर्नर्स ने एडमिशन लिया है। सबसे नए बैच में, 25.1% स्टूडेंट्स टियर 3 शहरों से हैं, जो इस प्रोग्राम की बड़े मेट्रोपॉलिटन सेंटर्स से बाहर के लर्नर्स तक पहुँचने की क्षमता को दिखाता है। अभी के बैच में 17 से 50 साल की उम्र के लर्नर्स भी शामिल हैं, जिनमें से कई ऐसे हैं जो किसी दूसरी अंडरग्रेजुएट डिग्री के साथ या प्रोफेशनल ज़िम्मेदारियों को मैनेज करते हुए यह प्रोग्राम कर रहे हैं।
प्रोग्राम का उद्देश्य
प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर-पीजीपीपीएम, आईआईएमबी।, बीबीए (डीबीई) और आईआईएमबी में एंटरप्रेन्योरशिप एरिया की फैकल्टी अर्चना श्रीवास्तव ने कहा-आईआईएम बैंगलोर में, डिजिटल बिज़नेस और एंटरप्रेन्योरशिप में बीबीए (डीबीई) के साथ हमारी कोशिश है कि मुश्किलों को कम किए बिना हाई-क्वालिटी मैनेजमेंट एजुकेशन तक सबकी पहुँच हो। हालाँकि यह प्रोग्राम ऑनलाइन दिया जाता है, लेकिन इसे एकेडमिक तौर पर डिमांडिंग और बहुत प्रैक्टिकल बनाया गया है। हम ऐसे मोटिवेटेड लर्नर्स की तलाश में हैं जो फॉर्मेट की फ्लेक्सिबिलिटी को महत्व देते हों और आईआईएम बैंगलोर की सख्त एजुकेशन के लिए लगातार कोशिश करने को तैयार हों।
शिक्षण की प्रक्रिया
स्टूडेंट्स आईआईएमबी फैकल्टी से सीखते हैं और दुनिया भर में जाने-माने मैनेजमेंट इंस्टिट्यूशन के एकेडमिक इकोसिस्टम से जुड़ते हैं, बिना किसी भौगोलिक रुकावट के। करिकुलम में स्ट्रक्चर्ड कोर्स, असेसमेंट, लाइव प्रोजेक्ट, पीयर लर्निंग और फैकल्टी के इनपुट शामिल हैं। ज़ोर इस बात पर है कि लर्नर्स कॉन्सेप्चुअल समझ को प्रैक्टिकल एप्लीकेशन से जोड़ सकें और मुश्किल एकेडमिक काम के लिए ज़रूरी डिसिप्लिन डेवलप कर सकें।
करके सीखने का महत्त्व
बीबीए (डीबीई) की एक खास बात यह है कि इसका फोकस ‘करके सीखने’ पर है। स्टूडेंट्स प्रोजेक्ट्स, एक्सपेरिमेंट्स और वेंचर-बिल्डिंग एक्सरसाइज करते हैं, जिससे वे क्लासरूम की इनसाइट्स को असल दुनिया की प्रॉब्लम्स पर अप्लाई कर पाते हैं। ‘₹250 वेंचर’ जैसे कोर्स स्टूडेंट्स को मौके पहचानने, एक्सपेरिमेंट करने, कस्टमर को समझने और रिसोर्सफुल एक्शन के बारे में बताते हैं। प्रोग्राम इकोसिस्टम में अभी टेक्नोलॉजी और एआई, सस्टेनेबिलिटी, कंसल्टिंग, ई-कॉमर्स और क्रिएटिव कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसे डोमेन में लगभग 200 स्टूडेंट-लेड स्टार्टअप्स शामिल हैं।
समुदाय और इंटरैक्शन
आईआईएमबी ने ऑनलाइन सेटिंग में पीयर लर्निंग और कम्युनिटी बनाने में मदद के लिए कई तरीके भी बनाए हैं। स्टूडेंट्स लर्निंग पॉड्स, स्टूडेंट-लेड सेल, सिटी मीट-अप और दूसरी स्ट्रक्चर्ड एंगेजमेंट एक्टिविटीज़ में हिस्सा लेते हैं। कैंपस इमर्शन, नोवा अनप्लग्ड और दूसरे चुने हुए ऑन-कैंपस एंगेजमेंट, पीयर्स के साथ बातचीत करने, आईआईएमबी इकोसिस्टम से जुड़ने और वर्चुअल क्लासरूम के बाहर रिश्ते बनाने के मौके देते हैं। ये चीज़ें स्टूडेंट्स को रिमोट लर्निंग की फ्लेक्सिबिलिटी और असल दुनिया के इंटरैक्शन से मिलने वाली गहराई, दोनों का अनुभव करने में मदद करती हैं।
स्टार्टअप्स के साथ जुड़ाव
यह प्रोग्राम स्टूडेंट्स को स्टार्टअप फाउंडर्स, प्रैक्टिशनर्स और बड़े प्रोफेशनल नेटवर्क से भी रूबरू कराता है। ‘शैडो ए स्टार्टअप फाउंडर’ और डेमो-डे स्टाइल एंगेजमेंट जैसी पहलों ने लर्नर्स को वेंचर्स बनाने और मैनेज करने की असलियत समझने में मदद की है। स्टूडेंट्स ने मैकिन्से, केपीएमजी, विप्रो और रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया जैसे ऑर्गनाइज़ेशन्स के साथ इंडिपेंडेंटली इंटर्नशिप और प्रोफेशनल मौके भी हासिल किए हैं।
सामान्य प्रश्न
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