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देवता शाश्वत नाबालिग हैं तो लागू होंगे सीपीसी के आदेश 32 के प्रावधान : हिन्दू पक्ष

मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद में शुक्रवार को हिंदू पक्ष की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में बहस की गई कि देवता शाश्वत नाबालिग हैं इसलिए...

देवता शाश्वत नाबालिग हैं तो लागू होंगे सीपीसी के आदेश 32 के प्रावधान : हिन्दू पक्ष
हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजSat, 25 May 2024 01:00 AM
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मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह विवाद में शुक्रवार को हिंदू पक्ष की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में बहस की गई कि देवता शाश्वत नाबालिग हैं इसलिए सीपीसी के आदेश 32 के प्रावधान (जो नाबालिग के विरुद्ध मुकदमे के संबंध में प्रक्रिया से संबंधित है) लागू होगा। यह भी कहा गया कि ये मुकदमे देवता भगवान केशव देव द्वारा मित्र के माध्यम से किए गए हैं और मुकदमा करने में कोई अवैधानिकता नहीं है। यह भी कहा कि मुकदमे की पोषणीयता का निर्णय मुकदमे में मुद्दे तय करने और पक्षों से साक्ष्य लेने के बाद किया जाना है।
न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन ने समयाभाव के कारण मामले की सुनवाई सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले हिंदू पक्ष की ओर से कहा गया था कि पूजा स्थल अधिनियम 1991 केवल अविवादित ढांचे के मामले में लागू होगा, विवादित ढांचे के मामले में यह नहीं लागू होगा। इस मुकदमे में विवादित स्थल का धार्मिक चरित्र तय किया जाना शेष है और यह केवल साक्ष्य द्वारा तय किया जाना है। ऐसे में मंदिर में अवैध निर्माण पर मुकदमा चलाने पर रोक नहीं लगाई जा सकती। यह सब मुकदमे में ही गुण दोष के आधार पर तय किया जाएगा।

मुस्लिम पक्ष की ओर से कहा गया कि मुकदमा मियाद अधिनियम से वर्जित है क्योंकि पक्षकारों ने 12 अक्टूबर 1968 को समझौता कर लिया था। उस समझौते द्वारा विवादित भूमि शाही ईदगाह की इंतजामिया कमेटी को दे दी गई थी। वर्ष 1974 में तय हुए एक दीवानी मुकदमे में इस समझौते की पुष्टि हो चुकी है। शाही ईदगाह की संरचना को हटाने के बाद कब्जे के साथ मंदिर की बहाली और स्थायी निषेधाज्ञा के लिए मुकदमा किया गया है। मुकदमे में प्रार्थना से पता चलता है कि ईदगाह की संरचना वहां है और इंतजामिया कमेटी का उस पर कब्जा है। इस तरह वक्फ संपत्ति पर विवाद उठाया गया है। ऐसे में इस मामले में वक्फ अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे और ऐसे मामले की सुनवाई का अधिकार वक्फ न्यायाधिकरण को है, न कि सिविल कोर्ट को।

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