तीर्थों में संतों के आगमन से ब्रह्मज्ञान की संक्रांति : सारथानंद
Prayagraj News - मानव उत्थान सेवा समिति ने मानव धर्म मंदिर अल्लापुर में सद्भावना सत्संग ज्ञान यज्ञ का समापन समारोह आयोजित किया। संत सारथानंद ने बताया कि भक्ति से मोक्ष प्राप्त होता है। साध्वी गंभीरा बाई और अन्य संतों ने भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर भक्तों ने भजन गाए और लघु नाटिका प्रस्तुत की।
मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से मानव धर्म मंदिर अल्लापुर में सद्भावना सत्संग ज्ञान यज्ञ का बुधवार को समापन समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर आश्रम प्रभारी संत सारथानंद ने कहा कि तीर्थों में संतों के जंगम तीर्थरूपी तत्वज्ञानियों के आगमन से हृदय में ब्रह्मज्ञान की संक्रांति होती है। संत अपने सद्गगुणों से हृदय की ब्रह्मज्योति को एकात्म करा देते हैं। साध्वी गंभीरा बाई ने कहा कि मनुष्य के जीवन की सार्थकता सच्ची भक्ति में है। भक्ति के मार्ग में परेशानियां जरूर हैं लेकिन आत्मिक संतुष्टि अनंत है। मुख्य वक्ता चंदन बाई ने कहा कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए भक्ति ही श्रेष्ठ मार्ग है।
साध्वी पद्मावती बाई और समुना बाई ने मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य के उत्तरायण होने के महत्व पर प्रकाश डाला। सारथानंद ने भजन चुनरिया रंग लो जी हरिनाम से रंग लो... प्रस्तुत कर भक्तों को भावविभोर कर दिया। संत विक्की ने कहा कि गुरु की शरण में आत्मज्ञान प्राप्त करके जीवन का कल्याण करना चाहिए। इस मौके पर वंदना, साक्षी, कोमल और आयुष ने लघु नाटिका सच्चा तीरथ की भावपूर्ण प्रस्तुति की। कलाकारों ने गंगा, यमुना व सरस्वती को मनुष्य की तीन नाड़ियों इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना के रूप में प्रस्तुत किया। इस मौके पर संयोजक जीके गोयल, इंद्रजीत साहू, आरएस यादव, शिव प्रताप सिंह, नितिन पाल, अनुराग गौतम, चंद्र प्रताप सिंह, अशोक मौर्य मौजूद रहे।

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