
नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 21 साल की जेल, कोर्ट ने 25 हजार का जुर्माना लगाया
Prayagraj News - विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अनिल बिंद को 21 साल की कठोर कारावास और 25,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि लैंगिक अपराधों पर रोक लगाना न्यायालयों की जिम्मेदारी है। पीड़िता को राहत राशि देने का भी आदेश दिया गया।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) विनोद कुमार चौरसिया की अदालत ने बुधवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। नाबालिग से दुष्कर्म करने वाले अनिल बिंद को 21 वर्ष की कठोर कारावास व 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया गया। अदालत ने कहा कि नाबालिगों पर बढ़ते लैंगिक अपराधों पर रोक लगाना न्यायालयों की प्राथमिक जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में कठोर दंड ही समाज को संदेश देता है। मामले में विशेष लोक अभियोजक विनय कुमार त्रिपाठी ने अदालत में पैरवी करते हुए बताया कि पीड़िता के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और साक्ष्य आरोपी की संलिप्तता पूरी तरह साबित करते हैं।
अभियोजन के अनुसार, घटना सरायइनायत थाना क्षेत्र में 23 अक्तूबर 2022 की रात की है। पीड़िता के पिता खेत पर धान की रखवाली करने गए थे। रात लगभग 2 बजे जब वह घर पहुंचे, तो उन्होंने अपनी 15 वर्षीय बेटी को आरोपी के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा। पिता ने जैसे ही आरोपी को पकड़ने की कोशिश की वह धक्का देकर भाग निकला। पीड़िता ने बताया कि इससे पहले भी 21 जून 2022 को एक शादी समारोह के दौरान आरोपी उसे पकड़कर झोपड़ी में ले गया और दुष्कर्म किया था।
परिजनों ने 28 नवंबर 2022 को थाना सरायइनायत में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अदालत ने सभी साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी को पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट की गंभीर धाराओं में दोषी करार दिया है। पीड़िता को राहत राशि भी देने का आदेश अदालत ने कहा कि दोषसिद्ध अनिल बिंद को लगाए गए कुल 25 हजार रुपये के अर्थदंड में से 10 हजार रुपये पीड़िता को अथवा उसकी मृत्यु होने पर उसके वैधानिक वारिसों को दिया जाए।

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