रंगमंच मेरा पेशा नहीं एक संस्कार है : सुषमा शर्मा

Newswrap हिन्दुस्तान, प्रयागराज
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Prayagraj News - प्रयागराज में हिन्दी रंगमंच दिवस पर विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता सुषमा शर्मा ने अभिनय और निर्देशन के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि रंगमंच उनके लिए केवल पेशा नहीं, बल्कि एक संस्कार है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ और अंत में अभिज्ञान शाकुंतलम् का मंचन किया गया।

रंगमंच मेरा पेशा नहीं एक संस्कार है : सुषमा शर्मा

प्रयागराज, संवाददाता। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (एनसीजेडसीसी) की ओर से हिन्दी रंगमंच दिवस के अवसर पर विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य वक्ता उप्र संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित अभिनेत्री व निर्देशिका सुषमा शर्मा ने अभिनय की बारीकियों से लेकर नाटकों के सशक्त निर्देशन तक से जुड़े संस्मरणों को साझा किया। उन्होंने बताया कि रंगमंच केवल मेरा पेशा नहीं है बल्कि मेरी सांसों में बसा एक संस्कार है। जब हम रंगमंच के माध्यम से नई पीढ़ी को जोड़ते हैं तो कला के साथ एक संवेदनशील व बेहतर समाज की मजबूत नींव रखते हैं।सुषमा शर्मा ने बताया कि अब तक लगभग 35 नाटकों में अभिनय और 54 नाटकों का निर्देशन कर चुकी हूं।

इसके अलावा एकल नाटकों (सोलो प्ले) ‘धूप का एक टुकड़ा’, ‘कृष्णा’, ‘चोला मोर माटी’ और ‘एक थी सारा’ में काम किया है। इसके पहले केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा व डॉ. मुकेश उपाध्याय ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। केंद्र के निदेशक ने सुषमा शर्मा को अंगवस्त्र व पौधा भेंटकर सम्मानित किया। संचालन आकाश अग्रवाल ने किया।अभिज्ञान शाकुंतलम् का हुआ मंचनसॉफ्ट पावर आर्ट एंड कल्चर रंगमंडल की ओर से आजाद जी के प्रतिमास्थल पर महाकवि कालिदास कृत नाटक अभिज्ञान शाकुंतलम् का मंचन किया गया। संस्था के सचिव ज्ञान चंद्रवंशी के निर्देशन में कलाकारों ने सशक्त अभिनय की प्रस्तुति की। संयोजन केके श्रीवास्तव का रहा।

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