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हिंदी भाषा के प्रति संवेदना और शुद्धता की जरूरत : अमरनाथ

सर्जनपीठ और भारती भवन पुस्कालय की ओर से आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की जयंती की पूर्व संध्या पर मंगलवार को पुस्तकालय के सभागार में लिपि और भाषा...

हिंदी भाषा के प्रति संवेदना और शुद्धता की जरूरत : अमरनाथ
हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजTue, 14 May 2024 09:30 PM
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सर्जनपीठ और भारती भवन पुस्कालय की ओर से आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी की जयंती की पूर्व संध्या पर मंगलवार को पुस्तकालय के सभागार में लिपि और भाषा विषय पर बौद्धिक परिसंवाद आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने आचार्य द्विवेदी के चित्र पर माल्यार्पण करके किया।
इस मौके पर मुख्य अतिथि पत्रकार अमरनाथ झा ने कहा कि भाषा के प्रति संवेदना और शुद्धता की जरूरत है। भाषा की अशुद्धता को दूर करने लिए हर स्तर पर भाषाबोध होना चाहिए। कला समीक्षक अजामिल व्यास ने कहा कि हिंदी संस्कार की भाषा है। हिंदी कई विषयों का पुंज है। पत्रकार व विचारक सतीश चंद्र तिवारी ने देवनागरी लिपि की वैज्ञानिकता पर प्रकाश डाला। अध्यक्षता कर रहे डॉ. धारवेन्द्र प्रताप त्रिपाठी ने कहा कि भाषा की शुद्धता के लिए प्राथमिक से विवि स्तर तक हिन्दी सुधार कार्यशाला आयोजित की जानी चाहिए।

आयोजक व संचालक भाषाविद आचार्य पं. पृथ्वीनाथ पांडेय ने बताया कि देवनागरी लिपि और हिंदी भाषा का वैश्विक विस्तार सराहनीय है। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में कार्यशालाएं होनी चाहिए। एमएनएनआईटी के सहायक निदेशक राजभाषा प्रमोद द्विवेदी, हरिशंकर तिवारी, डीएन सारस्वत, डॉ. कल्पना वर्मा, प्राचार्य पूर्णिमा मालवीय, कवयित्री चेतना चितेरी, उर्वशी उपाध्याय, शफी अहमद, डॉ. अभिषेक केसरवानी, कवि पं. राकेश मालवीय ने आचार्य द्विवेदी को याद करते हुए देवनागरी लिपि की वैज्ञानिकता और महत्व पर प्रकाश डाला। संयोजन पुस्तकालय अध्यक्ष स्वतंत्र कुमार पांडेय, आभार ज्ञापन प्रमोद ने किया।

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