
गंगा के कगार पर कटान रोकने से बढ़ गई संगम की गहराई
Prayagraj News - गंगा किनारे बने नए घाटों के कारण संगम की गहराई बढ़ गई है और प्रवाह तेज हो गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जाल लगाए गए हैं। अब संगम की गहराई 15 फीट तक पहुंच गई है। जल का प्रवाह कम करने के लिए कानपुर बैराज से डिस्चार्ज घटाया गया है, ताकि मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर सुरक्षित स्नान हो सके।
गंगा किनारे भव्य घाट बनाए जाने के बाद से संगम की गहराई बढ़ गई है। गंगा का प्रवाह भी तेज हो गया है। संगम की गहराई और प्रवाह कम करने के लिए जल के नीचे और ऊपर श्रद्धालुओं के सुरक्षित स्नान के लिए जाल लगाया गया है। साथ ही संगम पर नाविक स्नान करने वाले श्रद्धालुओं पर निगरानी कर रहे हैं। पहले संगम पर गहराई पांच से छह फीट होती थी। तब संगम के प्रवाह क्षेत्र में तखत रखा जाता था। श्रद्धालु तखत पर खड़े होकर स्नान करते थे। अब संगम की गहराई 15 फीट तक होने की बात कही जा रही है।
नाविकों ने श्रद्धालुओं के सुरक्षित स्नान के लिए जाल लगाया है। गंगा के तेज प्रवाह से बचाने के लिए संगम के ऊपर भी जाल लगाया गया है। नाविकों का कहना है कि महाकुम्भ के दौरान दारागंज की ओर बड़ा घाट बनाने के लिए जिओ ट्यूब लगाकर गंगा का प्रवाह स्थायी करने के बाद संगम की गहराई बढ़ी। इलाहाबाद नाविक यूनियन के अध्यक्ष कलंदर चौंधियार ने बताया कि जिओ ट्यूब से धारा को स्थायी कर घाट तो बड़ा बना दिया, लेकिन क्षेत्र सिकुड़ने से गंगा का प्रवाह तेज हुआ और संगम की गहराई बढ़ गई है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दिग्विजय नारायण शुक्ला ने बताया कि जिओ ट्यूब लगाए जाने के बाद स्नान के लिए संगम किनारे बड़ा घाट मिल गया। गंगा का प्रवाह भी तेज हुआ है, लेकिन संगम की गहराई सामान्य से अधिक होने से इनकार किया। अधिशासी अभियंता के अनुसार सगंम में यमुना पट्टी की ओर गहराई बढ़ी है। चार दिन में एक हजार क्यूसेक घटाया डिस्चार्ज माघ मेला में गंगा का प्रवाह कम करने के लिए चार दिन में कानपुर बैराज से डिस्चार्ज एक हजार क्यूसेक तक घटाया गया है। माघ मेला के सबसे बड़े मौनी अमावस्या स्नान पर्व (रविवार) के एकदिन पहले शनिवार को कानपुर बैराज से गंगा में छह हजार 470 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जबकि मकर संक्रांति स्नान पर्व के एकदिन पहले सात हजार 387 क्यूसेक पानी बैराज से छोड़ा गया था। सिंचाई विभाग (बाढ़ प्रखंड) के इंजीनियरों का दावा है कि मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर श्रद्धालुओं को संगम में डुबकी लगाने के लिए सुरक्षित प्रवाह मिलेगा।

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