
फटीचर बाबा के रंग निराले, सबको बोलते राम-राम
Prayagraj News - प्रयागराज के माघ मेले में 'फटीचर बाबा का राम-राम' शिविर साधु-संतों की भक्ति का अद्भुत उदाहरण है। यहां तीन फटीचर बाबा साधारण जीवन जीते हैं, केवल राम नाम का जाप करते हैं और जरूरतमंदों की मदद करते हैं। शिविर में सबका स्वागत है और कोई भेदभाव नहीं है। सभी एक साथ मिलकर भोजन करते हैं।
प्रयागराज। संगम तट पर लगे माघ मेला में साधु-संतों के रंग निराले हैं। तरह-तरह के रूप-रंग में ये संत भक्ति की छटा बिखेर रहे हैं। इन्हीं में से सेक्टर-6 के अंतिम छोर पर सादे कैंप में रह रहे फटीचर बाबा बरबस सबका ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। कैंप के बाहर बैनर पर लिखा है-‘फटीचर बाबा का राम-राम’। नाम सुनकर भले ही लोग चौंक जाएं लेकिन यही नाम उनकी सोच और साधना का सार है। ‘फटीचर बाबा का राम-राम कैंप’ पूरी तरह प्रभु श्रीराम के नाम को समर्पित है। इस समय यहां तीन फटीचर बाबा राम रहते हैं। न कोई मंच, न गद्दी, न आडंबर।
जमीन पर साधारण ढंग से बैठे ये बाबा, मेले में घूमने वाले किसी आम श्रद्धालु जैसे ही नजर आते हैं। शिविर में प्रवेश करते ही चारों ओर राम-राम की ध्वनि गूंजने लगती है। हर कार्य से पहले राम नाम का जाप होता है। यहां तक कि बाबाओं के वस्त्रों पर भी राम-राम लिखा हुआ है। तीनों साधक चित्रकूट के निवासी हैं। दो साल पहले इनके गुरुदेव ब्रह्मदेव ने ही इस शिविर का नाम ‘फटीचर बाबा का राम-राम’ रखा था। हालांकि संस्था बहुत पुरानी है। बाबा बताते हैं-‘भगवान राम जब निकले थे, तब न चप्पल थी, न साधन… सिर्फ फकीरी का जज़्बा था।’ यही उनके जीवन का सार है। नाम के जितना सादा है जीवन फटीचर बाबा के नाम के जितना सादा और सरल उनका जीवन भी है। भोजन में बस मोटी रोटी, दाल और मिर्च का प्रसाद पाते हैं। फटीचर बाबा कहते हैं-‘हमारा सब कुछ राम है। राम नाम में ही हमारा संसार बसता है।’ यहां न भिक्षा मांगी जाती है, न धन का संग्रह होता है। जो दान मिलता है, उससे कंबल, साड़ियां और चादरें खरीदकर जरूरतमंदों को बांट दी जाती हैं। कई बार बाबा खुद भोजन बनाकर लोगों को खिलाते भी हैं। इनके शिविर में कोई भेदभाव नहीं है जो आता है, वही परिवार का हिस्सा बन जाता है। जमीन पर बैठकर सभी एक साथ भोजन करते हैं। खास बात यह कि शिविर में प्रवेश करते ही हर व्यक्ति का नाम हो जाता है-‘फटीचर बाबा राम’।

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