Hindi NewsUttar-pradesh NewsPrayagraj NewsFaith and Tradition Shine at Sangam Families Bring Deities for Ritual Bathing
गोद में गोविंदा, जुबां पर गंगा मइया की जय

गोद में गोविंदा, जुबां पर गंगा मइया की जय

संक्षेप:

Prayagraj News - झांसी के अजय कुमार शर्मा अपने परिवार के साथ संगम स्नान के लिए गए। सभी ने भगवान गोविंद की प्रतिमा के साथ स्नान किया। बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ स्नान किया। परंपरा के अनुसार, परिवारों ने अपने ईष्ट को स्नान कराकर इस धार्मिक अवसर को और खास बनाया।

Jan 15, 2026 06:46 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, प्रयागराज
share Share
Follow Us on

झांसी के अजय कुमार शर्मा अपनी पत्नी, बेटों, बहुओं, बेटी-दामाद और नाती-पोतों सहित कुल 16 लोगों के साथ संगम की ओर स्नान करने जा रहे थे। एक जैसा पहनावा बता रहा था कि वो सब एक ही परिवार के थे। अजय के हाथों में बाल गोविंद की छोटी सी प्रतिमा थी। सभी ‘जय श्रीकृष्ण’, ‘गंगा मइया की जय’ के नारे लगाते हुए बढ़ दिखे। पूछने पर परिवार ने बताया कि लड्डू गोपाल हमारे परिवार के सदस्य हैं। उनको स्नान कराते ही हैं, आज संगम स्नान के लिए पूरा परिवार आया है तो पहले गोविंद को स्नान कराएंगे। कानपुर के विकास त्रिपाठी का परिवार भी हाथ में गोविंद की प्रतिमा लिए आया था।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

एक-दो परिवार नहीं, मेले में कई श्रद्धालु संक्रांति के अवसर पर ऐसे ही भगवान की प्रतिमा के साथ स्नान करने आए थे। इस संक्रांति संगम का नजारा अलग ही दिखाई दिया। साढ़े तीन से चार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर जब 80-90 साल के बुजुर्ग संगम नोज के करीब पहुंचे तो आस्था में उनकी आंखें छलक उठीं। कोई राम का नाम जप रहा था तो कोई महादेव के जयकारे लगा रहा था। कोई जय मां अंबे कह रहा था तो कोई गंगा मइया के जयकारे लगा रहा था। करीब 77 साल की पार्वती देवी ऐसे दौड़ते हुए गंगा की गोद में उतरीं कि आसपास लोग उनको देखते ही रह गए। संगम पर युवाओं की टोली अपनी ही धुन में थी। उनके लिए स्नान तो महत्वपूर्ण था ही, लेकिन अपनी डुबकी, संगम के किनारे की रील बनाकर इसे सोशल मीडिया पर अपलोड करने की एक होड़ भी थी। किसी ने माथे पर त्रिपुंड लगाया तो किसी ने राम का नाम छपवाया और इसकी फोटो खींचकर तत्काल दोस्तों और रिश्तेदारों को भेज दी। दिन जैसे-जैसे चढ़ता गया, धूप खिलने लगी तो भीड़ भी बढ़ी और उत्साह भी। स्नान के बाद पुलिस ने बहुत देर घाट पर रुकने नहीं दिया तो चलते-फिरते ही सही रिकॉर्डिंग भी खूब हुई। अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम ने बताया कि जिन भी घरों में भगवान को स्नान कराया जाता है, उन्हें संगम स्नान से पहले भगवान को स्नान कराना चाहिए। पहले संतों में यह परंपरा थी। सभी परंपरा के संत अपने ईष्ट को सबसे पहले स्नान कराते थे। अब गृहस्थों ने भी इसे अपनाना शुरू किया है। यह परंपरा हमारे धर्म और संस्कृति को और भी सुदृढ़ बना रही है।