
पंचायत सहायकों की तैनाती में भाई भतीजावाद खत्म
Prayagraj News - पंचायत सचिवालयों में सहायकों की तैनाती में भाई भतीजावाद खत्म किया गया है। इससे पहले कई स्थानों पर भाई और भतीजे की भर्ती के आरोप थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोविड से प्रभावित युवाओं को प्राथमिकता देने का आदेश दिया था। अब सभी को शपथ पत्र देना होगा कि उनका प्रधान से कोई रिश्ता नहीं है।
पंचायत सचिवालयों में काम को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सहायकों की तैनाती में अब भाई भतीजावाद खत्म कर दिया गया है। प्रधानों पर इस भर्ती को लेकर लगातार आरोप लग रहे थे, प्रदेश में कुछ स्थानों पर भाई और भतीजे की भर्ती की गई। जिसके बाद प्रमुख सचिव पंचायत राज विभाग अनिल कुमार की ओर से आदेश जारी कर व्यवस्था में संशोधन किया गया। कोरोना काल में पंचायतों के काम को सुचारू करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंचायत सहायकों की तैनाती का आदेश दिया था। गांव के उन युवकों को वरीयता देनी थी, जिनके परिजनों की मौत कोविड के दौरान मृत्यु हुई थी।
इसके बाद गांव के शिक्षित युवकों को स्थान देना था। एक व्यवस्था दी गई थी इसमें प्रधान अपने परिजनों को पंचायत सहायक के रूप में नहीं रखेंगे। सम्बन्धियों के आगे पिता, दादा, ससुर (माता-पिता दोनों पक्षों से), पुत्र, पौत्र, दामाद, पुत्र-वधु, बहन, पति, पत्नी, पुत्री और मां शामिल किया गया था। इन्हीं शब्दों को आधार बनाकर कुछ प्रधानों, सदस्यों व सचिवों ने अपने भाई और भतीजे को पंचायत सहायक के रूप में तैनात कर दिया। मामला पकड़ में आया तो इस पर आपत्ति जाहिर की गई। जिम्मेदारों ने दिए गए शब्दों को आधार बनाकर कहा कि इसमें भाई और भतीजा शामिल नहीं है। पिछले दिनों इस पर लोगों ने कोर्ट में रिट की। कोर्ट ने नियम में संशोधन के निर्देश दिए थे। जिसके बाद प्रमुख सचिव पंचायती राज विभाग अनिल कुमार ने इसमें भाई और भतीजा शब्द को भी जोड़ा। साथ ही सभी जिलों में पंचायती राज अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इस क्रम में उचित कार्रवाई करें। डीपीआरओ रवि शंकर द्विवेदी ने बताया कि आदेश की प्रति आ गई है। जिले में इस वक्त 1540 सहायकों के सापेक्ष 1500 सहायक तैनात हैं। सभी से इसके बारे में शपथ पत्र लिया जा रहा है कि उनका प्रधान से कोई रिश्ता नहीं है। अगर कोई तथ्य छिपाएगा तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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