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प्रयागराजकुशलता से चुनाव कराया और ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटके

हिन्दुस्तान टीम,प्रयागराजPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 04:10 PM
कुशलता से चुनाव कराया और ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटके

प्रयागराज वरिष्ठ संवाददाता

पंचायत चुनाव में मुस्तैदी से ड्यूटी करने वाले सिंचाई विभाग के नलकूप ऑपरेटर रहे ज्ञानचंद्र निषाद को पता भी नहीं रहा होगा कि चुनाव में संक्रमित होने पर उन्हें ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटककर जान गंवानी पड़ेगी। जान देने के बाद हालात ये हैं कि परिवार अब दोराहे पर खड़ा है। पिता की नौकरी के दम पर बच्चों ने एक गाड़ी फाइनेंस कराई थी आज उसकी ईएमआई के लाले पड़ गए हैं। परिवार को मुआवजा तो दूर अब तक विभाग से फंड का पैसा भी नहीं मिल सका है।

ज्ञानचंद्र निषाद अपने पीछे पत्नी, दो बेटे और बेटियों से भरा परिवार छोड़ गए। बेटियों की शादी उन्होंने कर दी थी। बेटों को कहीं लगवा पाते इसके पहले चुनाव आ गया। चुनाव में 15 अप्रैल को उन्होंने ड्यूटी की और इस दौरान संक्रमित हो गए। घर आने के बाद जब तबीयत बिगड़ी तो घरवालों ने अस्पताल की दौड़ लगानी शुरू की। लेकिन कहीं भी बेड नहीं मिला। बेटा संदीप वह मंजर याद कर कांप जाता है, जब बदहवास पिता को शहर की सड़कों पर लेकर वह भटक रहा था। कहीं कोई मदद नहीं मिली। संदीप ने अपने छोटे भाई रंजीत के साथ मिलकर कहीं से सिलेंडर का बंदोबस्त किया और घर पर पिता को ऑक्सीलन देने लगे। हालात सामान्य होने पर 25 अप्रैल को ज्ञानचंद्र निषाद को एसआरएन अस्पताल में जगह मिली, लेकिन तब तक शायद देर हो चुकी थी। आधी रात के बाद एसआरएन के बेड पर ही ज्ञानचंद्र निषाद ने दम तोड़ दिया। सिंचाई विभाग गए निषाद परिवार को भरोसा दिया गया कि कुछ राशि 10 दिन में दी जाएगी, लेकिन एक रुपये अब तक खाते में नहीं आया।

आज भी पूरे कर रहे हैं कागज

संदीप ने बताया कि शुरुआती 13 दिन तो घर से निकल ही नहीं सकते थे, उसके बाद जब विभाग पहुंचे तो आश्वासन मिल गया। दस्तावेज पूरा कराए, लेकिन अभी भी पारिवारिक सदस्यता प्रमाणपत्र और मां की बैंक पासबुक देना बाकी है। इसके बाद शायद कुछ राशि निकल आए।

लॉकडाउन में हो गए बेकार

संदीप बालू सप्लाई करते हैं, लेकिन लॉकडाउन में बिल्डिंग मैटीरियल का काम एकदम ठप पड़ गया है। छोटा भाई रंजीत अभी पढ़ाई कर रहा है। पिता की कमाई के सहारे एक गाड़ी फाइनेंस कराई थी, जिसकी ईएमआई देने के अब लाले पड़ गए हैं।

पत्र व्यवहार नहीं मुआवजा देना होगा

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष अजय भारती का कहना है कि केवल पत्र व्यवहार नहीं, जान गंवाने वाले लोगों को उचित मुआवजा देना होगा। विभागों में केवल पत्र आ रहे हैं कि इन लोगों के सारे भुगतान समय से कराएं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

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