नहीं सुलझा जमीन का विवाद, धरने पर डटे तीर्थ पुरोहित
Prayagraj News - प्रयागराज में माघ मेले के दौरान खाकचौक व्यवस्था समिति और तीर्थ पुरोहितों के बीच जमीन आवंटन को लेकर विवाद जारी है। तीर्थ पुरोहितों ने मेला प्राधिकरण कार्यालय के बाहर धरना दिया और तीन प्लॉट वापस लौटाने की मांग की। संतों में चिंता बढ़ रही है क्योंकि जमीन की कमी के कारण व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
प्रयागराज, वरिष्ठ संवाददाता। माघ मेला क्षेत्र में महावीर मार्ग सेक्टर तीन से विस्थापित करने के मामले में खाकचौक व्यवस्था समिति और तीर्थ पुरोहितों के बीच गहराया विवाद फिलहाल थमता दिखाई नहीं दे रहा है। तीर्थ पुरोहितों ने गुरुवार को मेला प्राधिकरण कार्यालय पर दूसरे दिन भी धरना दिया और उनके तीन प्लॉट जो खाकचौक व्यवस्था समिति को दिए गए हैं, उसे लौटाने की मांग की। इस बीच व्यवस्था समिति ने भी शिविर लगाने का काम शुरू नहीं किया। वहीं अब तक मेले में रह रहे, व्यवस्था समिति के प्रधानमंत्री जगद्गुरु संतोषदास ‘सतुआ बाबा’ किसी काम से वाराणसी चले गए। माघ मेले में खाकचौक व्यवस्था समिति के संतों ने जमीन की कमी को लेकर मेला से बहिष्कार का ऐलान किया था।

जिसके बाद मेला प्राधिकरण ने तीर्थ पुरोहितों के तीन प्लॉट समिति को दे दिए। जब इसकी जानकारी हुई तो तीर्थ पुरोहितों ने बुधवार से मेला प्राधिकरण कार्यालय में प्रदर्शन शुरू कर दिया। गुरुवार को अध्यक्ष प्रदीप पांडेय ने कहा कि जब तक मेला प्रशासन जमीन उन्हें नहीं लौटाएगा, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। दोनों ही पक्ष मेले के रिकार्ड में जमीन को अपना बता रहे हैं। इसे लेकर मेला प्राधिकरण कार्यालय पर दूसरे दिन अध्यक्ष प्रदीप पांडेय के साथ महामंत्री असीम भारद्वाज, राजेंद्र पालीवाल, अनिल पांडेय, मनोज पांडेय, पुष्कर तिवारी, विवेक तिवारी, मयंक दुबे, शिवम मिश्र, विजय मिश्र, आशुतोष पालीवाल, विशाल शर्मा, अंजनी भारद्वाज आदि मौजूद रहे। दलदल वाली जमीन हमें स्वीकार नहीं प्रयागराज। जगद्गुरु संतोषदास ‘सतुआ बाबा’ ने बताया कि प्रशासन से गुरुवार को भी कोई सार्थक बात नहीं हो सकी है। उन्हें दलदल की जमीन दी जा रही है, जो किसी भी दशा में स्वीकार करने योग्य नहीं है। सभी संत एकमत हैं कि खाकचौक एक साथ बसेगा। हमारे यहां तमाम श्रद्धालु आते हैं और इन्हें लेकर तमाम सुविधाओं को बढ़ाना होगा। संतों में बढ़ी बेचैनी, बढ़ाई गईं सुविधाएं प्रयागराज। खाकचौक की जमीन आवंटित न होने के कारण संतों में बेचैनी बढ़ी है। अगर प्रशासन ने बाद में जमीन दी तो सारी व्यवस्थाएं कैसे होंगी। वेंडर भी असमंजस में हैं कि कम समय में कैसे व्यवस्थाएं पूरी करेंगे। वहीं मेला प्राधिकरण ने दलदल हटाने के लिए काम बढ़ा दिया है। गुरुवार को अक्षयवट मार्ग पर 20 जेसीबी लगा दी गई है। मेलाधिकारी ऋषिराज, अपर मेलाधिकारी दयानंद प्रसाद ने निरीक्षण कर यहां की व्यवस्थाओं को देखा। अफसरों का दावा है कि अधिकतम एक सप्ताह में व्यवस्थाएं दुरुस्त हो जाएंगी।

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