संयम, संस्कार ही जीवन की वास्तविक पूंजी : मुनि सागर
प्रयागराज के जीरो रोड स्थित जैन मंदिर में धर्मसभा का आयोजन किया गया। मुनि सागर ने कहा कि आज के समय में व्यक्ति मानसिक शांति से दूर है, जिसका मुख्य कारण संस्कार और आत्मसंयम की कमी है। उन्होंने बच्चों को नैतिकता और अनुशासन सिखाने पर जोर दिया और युवाओं को अध्ययन और आत्मचिंतन का आह्वान किया।
प्रयागराज, संवाददाता। जीरो रोड स्थित जैन मंदिर में रविवार को धर्मसभा आयोजित की गई। इस अवसर पर मुनि सागर ने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य सुख-सुविधाओं के बीच रहकर भी मानसिक शांति से दूर होता जा रहा है। इसका मुख्य कारण जीवन में संस्कार और आत्मसंयम की कमी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति व्यक्ति को केवल भौतिक उन्नति नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और आत्मविकास की प्रेरणा देती है। मुनि ने कहा कि बच्चों को छोटी उम्र से ही नैतिकता, अनुशासन और संस्कार सिखाना चाहिए। जिस घर में धर्म, विनम्रता और सदाचार का वातावरण होता है, वहां सुख और शांति रहती है।
मुनि अतुल सागर ने कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में समय का सदुपयोग करना चाहिए। संयम, संतोष और सकारात्मक चिंतन जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं। उन्होंने युवाओं को अध्ययन, संस्कार और आत्मचिंतन पर ध्यान देने का आह्वान किया। इस अवसर पर प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम आयेाजित किया गया। भक्तामर स्तोत्र विधान व विश्व शांति के निमित्त शांतिधारा का आयोजन किया गया।धन कुमार जैन, अरुण जैन, मौसम जैन, राजेंद्र नगर मौजूद रहे।
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