इतिहास बन जाएगा 64 वर्ष पुराना आरओबी
Prayagraj News - प्रयागराज में दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर स्थित जर्जर रेलवे ओवर ब्रिज को 15 मई से ध्वस्त किया जाएगा। यह ब्रिज 850 मीटर लंबा है और इसे पूरी तरह से हटाने में दो महीने का समय लगेगा। नए ब्रिज के निर्माण के लिए 51 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ है।
प्रयागराज। दिल्ली-हावड़ा रेलमार्ग पर हाईकोर्ट के समीप स्थित पानी की टंकी का जर्जर हो चुका रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) अब इतिहास बनने जा रहा है। 850 मीटर लंबे ब्रिज को ध्वस्त करने का कार्य 15 मई से शुरू किया जाएगा और पूरी तरह से हटाने में दो महीने का समय लग जाएगा। अब इसके लिए राज्य सेतु निगम प्रयागराज इकाई की ओर से विभागीय स्तर पर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पानी की टंकी आरओबी को ध्वस्त करने का कार्य सेतु निगम व एनसीआर दोनों मिलकर करेंगे। खास बात है कि यह शहर का पहला ऐसा ब्रिज है, जिसे पीडब्ल्यूडी ने वर्ष 1962 में बनाया था और बनाए जाने के आठ वर्षों के बाद सेतु निगम को सौंप दिया गया था।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो अक्तूबर 1969 में निगम के अधिशाषी अभियंता एमएमडी सेठ थे। पिछले दो वर्षों से जर्जर होने के बाद ब्रिज से बड़े वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया गया था। जिसके बाद निगम से इसके समानांतर दो लेन का नया आरओबी बनाए जाने का प्रस्ताव लखनऊ मुख्यालय भेजा गया था। नए ब्रिज का निर्माण कराने के लिए 12 फरवरी को राज्यपाल की मंजूरी के बाद 51 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ था। जबकि 50 लाख रुपये से जर्जर ब्रिज को ध्वस्त किया जाना था। निगम के परियोजना प्रबंधक रोहित मिश्र ने बताया कि 15 से 20 मई के बीच ब्रिज को ध्वस्त करने का कार्य शुरू कराया जाएगा। लूकरगंज क्षेत्र की ओर से जैसे-जैसे ब्रिज को ध्वस्त किया जाएगा, वैसे-वैसे नए ब्रिज का निर्माण कार्य भी कराया जाएगा।
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