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डेंगू मच्छर के काटने से भी हो सकता है लकवा

डेंगू मच्छर के काटने से भी हो सकता है लकवा

संक्षेप:

Prayagraj News - प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के शोध में पता चला है कि डेंगू वायरस केवल खून को ही नहीं, बल्कि तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित करता है। तीन मरीजों पर अध्ययन में समय पर इलाज से सभी मरीज पूरी तरह...

Tue, 14 Oct 2025 09:02 PMNewswrap हिन्दुस्तान, प्रयागराज
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प्रयागराज। ईश्वर शरण शुक्ल। डेंगू को मुख्य रूप से बुखार और प्लेटलेट्स घटाने वाली बीमारी के तौर पर माना जाता है। आम धारणा है कि इसका वायरस सिर्फ खून को ही प्रभावित करता है लेकिन हालिया शोध से पता चला है कि यह वायरस मरीज के तंत्रिका तंत्र पर भी असर डालता है। इलाज में देरी होने पर मरीज लकवा (क्वॉड्रिप्लेजिया) का भी शिकार हो सकता है। डेंगू के बदलते स्वरूप से संबंधित यह चौंकाने वाला तथ्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों द्वारा किए गए शोध में सामने आया है। मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. पूनम गुप्ता ने बताया कि टीम ने तीन ऐसे डेंगू मरीजों पर अध्ययन किया, जिनके शरीर के चारों अंग लकवाग्रस्त थे।

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इनमें से एक मरीज की रीढ़ की हड्डी में खराबी से उसका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया था। डॉक्टरों की भाषा में इस स्थिति को एलईटीएम (लॉन्गिट्यूडनिल एक्सटेंसिव ट्रांसवर्स मायलाइसिस) कहते हैं। दूसरे मरीज के खून में पोटैशियम की कमी पाई गई, जिससे उसके शरीर में कमजोरी आ गई थी। इस स्थिति को हाइपोकैलिमिक पैरालिसिस कहते हैं। वहीं, तीसरे मरीज की मांसपेशियों में सूजन और दर्द पाया गया, जिसे डॉक्टर डेंगू मायोसाइटिस कहते हैं। अध्ययन में एक सुखद बात सामने आई कि समय पर हुए इलाज से डेंगू के ये तीनों मरीज पूरी तरह से स्वस्थ हो गए। डॉक्टरों की टीम ने पाया कि जिस मरीज की रीढ़ की हड्डी में खराबी से उसका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया था, वह जल्दी स्वस्थ हो गया। बकौल डॉ. पूनम, यह अध्ययन प्रमाण है कि डेंगू का वायरस केवल खून को ही नहीं बल्कि तंत्रिका तंत्र को भी प्रभावित कर सकता है। अगर डेंगू के मरीज में अचानक कमजोरी आती है या फिर चलने में कठियाई या हाथ-पैर में सुन्नपन जैसे लक्षण सामने आते हैं तो उसे तत्काल उचित चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। लिवर, किडनी, फेफड़े पर भी असर डॉ. गुप्ता ने बताया कि अध्ययन से यह भी पता चला कि डेंगू का प्रभाव लिवर, किडनी, फेफड़ा तथा आंख के पीछे वाले भाग पर भी पड़ता है। शोध टीम में डॉ. गुप्ता के साथ डॉ. अजीत कुमार चौरसिया, डॉ. आशीष राय, डॉ. अर्चना ओझा और डॉ. मधुरिमा सिंह भी शामिल रहे। इससे जुड़ा शोध पत्र स्विट्जरलैंड से प्रकाशित होने वाले अंतरराष्ट्रीय जर्नल एसएन कंप्रेहेंसिव क्लीनिकल स्प्रिंगर नेचर के हालिया अंक में प्रकाशित हुआ है। चिकित्सा जगत में अब डेंगू के बदलते स्वरूप और उपचार की नवीनतम तकनीक पर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। बॉक्स में- प्रयागराज में डेंगू के मरीज वर्ष संख्या 2018 830 2019 1121 2020 57 2021 1299 2022 1465 2023 505 2024 344 2025 54 अब तक