दमा-दम मस्त कलंदर... पर झूमे श्रोता
Prayagraj News - एनसीजेडसीसी द्वारा आयोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय शिल्प में शनिवार को कव्वाली और लोकनृत्य का शानदार कार्यक्रम हुआ। मुख्य अतिथि आशीष यादव ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उजाला परवीन ने देशभक्ति की पंक्तियों से शुरुआत की, जबकि छऊ नृत्य, लावणी और अन्य लोकनृत्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया।
एनसीजेडसीसी की ओर से आयोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय शिल्प में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में शनिवार को कव्वाली और लोकनृत्य की प्रस्तुति की गयी। इस मौके पर लोगों ने गुनगुनी धूप में खरीदारी के साथ शानदार कव्वाली का भी आनंद उठाया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आशीष यादव भारतीय रक्षा लेखा सेवा और विशिष्ट अतिथि एनसीजेडसीसी के पूर्व कार्यक्रम प्रभारी राजेन्द्र कुमार ने किया। इस मौके पर कव्वाल गायिका उजाला परवीन ने कार्यक्रम की शुरुआत देशभक्ति को समर्पित पंक्तियां सबसे प्यारा हिंदुस्तान हमारा, जान से प्यारा वतन हमारा...से की। उसके बाद उसने ऐसा जख्म दिया है, ये दिल हसंना भूल गया...इस दिल को बेकरार किया तुमने क्या किया... और दमा-दम मस्त कलंदर...की शानदार प्रस्तुतियों से समां बांधा।

साथ ही चाहे मार डारा, चाहे काट डारो राजा हम तो यारी करेंगे दिलदारी करेंगे... और जनक दुलारी के, जानकी प्यारी के मन में बसे श्रीराम...प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। लोकनृत्यों की कड़ी में सृष्टिधर महतो और दल ने शुंभ-निशुंभ वध पर आधारित प्रभावशाली छऊ नृत्य की प्रस्तुति दी। दिव्या सुधीर भावे और दल ने लावणी, कुमार उदय सिंह और कलाकारों ने छमासा झूमर और झिंझिया नृत्य की प्रस्तुति दी। शिवराज विश्वकर्मा ने बिरहा प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। स्वागत कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने किया।

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