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28 सितम्बर, 2020|3:39|IST

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गांव में नहीं दिखा कोरोना इफेक्ट

गांव में नहीं दिखा कोरोना इफेक्ट

गांवों में कोरोना का प्रभाव व खौफ उस कदर नहीं दिखा। गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान केंद्र की ओर से कोरोना काल में गांवों में किए गए सर्वे में यह निष्कर्ष निकल कर सामने आया है। संस्थान के शिक्षाविदों ने जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी के दो-दो गांवों में जाकर वहां के दैनिक जीवन को करीब से देखा।

प्रो. भाष्कर मजुमदार ने प्रयागराज के मलखानपुर और इनायपट्टी गांव का सर्वे किया। उन्होंने बताया कि 5000 लोगों की आबादी वाले मलखानपुर गांव में सभी हिन्दू हैं। इनायपट्टी लगभग 2500 लोगों का गांव है। यहां हिन्दू, मुस्लिम और दलित रहते हैं। कोरोना काल में दिल्ली, मुम्बई, गुजरात और उत्तराखंड आदि स्थानों से ट्रक, पैदल और साइकिल से चलकर गांव लौटे कामगारों ने कोविड-19 की गाइड लाइन का पालन किया और खुद को 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर लिया। उस दौरान न कोई कोरोना संक्रमित निकला और न ही कोरोना वायरस का प्रसार हुआ।

इसके बाद रोजी रोजागार के लाले पड़ गए। जब गांव में काम नहीं मिला और मनरेगा के मिट्टी से जुड़े काम प्रवासी मजदूरों को रास नहीं आए तो वह दोबारा उन शहरों में जाने की तैयारी करते दिखे जहां से वो लौटकर आए थे। अब उन्हें कोरोना का कोई डर नहीं दिखाई दे रहा।

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  • Web Title:Corona effect did not show in the village